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ब्रह्मोस मिसाइल को रूस की सेना में शामिल करने की तैयारी, भारत से सप्लाई पर बातचीत तेज

रूस ने ब्रहमोस मिसाइल को अपनी सेना में शामिल करने में रुचि दिखाई है। भारत और रूस के बीच उत्पादन बढ़ाने और सप्लाई को लेकर बातचीत जारी है। ऑपरेशन सिंदूर के बाद इस मिसाइल की वैश्विक मांग तेजी से बढ़ी है।

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भारत

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Himadri Joshi

Jun 18, 2026

BrahMos missile

रूस की सेना में शामिल होगी ब्रहमोस मिसाइल (फोटो- एएनआई)

भारत और रूस के संयुक्त रक्षा सहयोग का सबसे मजबूत प्रतीक मानी जाने वाली ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल अब रूस की सेना में भी शामिल हो सकती है। पिछले कुछ वर्षों में इस मिसाइल की वैश्विक पहचान तेजी से मजबूत हुई है और कई देशों ने इसमें रुचि दिखाई है। अब ब्रह्मोस एयरोस्पेस के प्रमुख जैतीर्थ जोशी ने खुलासा किया है कि रूस इस मिसाइल को अपनी सेना में शामिल करने को लेकर गंभीर चर्चा कर रहा है और भारत से सप्लाई बढ़ाने पर भी बातचीत जारी है।

उत्पादन क्षमता बढ़ाने के लिए भारत से सिस्टम सप्लाई

ब्रह्मोस एयरोस्पेस के मुख्य कार्यकारी अधिकारी जैतीर्थ जोशी ने नागपुर में मीडिया से बातचीत के दौरान कहा कि रूस ने मौजूदा वैश्विक सुरक्षा परिस्थितियों को देखते हुए ब्रह्मोस मिसाइल की अतिरिक्त जरूरत जताई है। उन्होंने बताया कि रूस के पास पहले से उत्पादन सुविधाएं मौजूद हैं, लेकिन बढ़ती मांग के कारण ज्यादा उत्पादन क्षमता की आवश्यकता महसूस की जा रही है। ऐसे में भारतीय उद्योग रूस के साथ मिलकर उत्पादन क्षमता बढ़ाने में सहयोग कर सकते हैं। जोशी के अनुसार भविष्य में भारत से मिसाइल सिस्टम सप्लाई किए जाने की संभावना भी मजबूत है। ब्रह्मोस मिसाइल को रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) और रूस की एनपीओ मशीनोस्त्रोयेनिया (NPOM) ने संयुक्त रूप से विकसित किया है।

ऑपरेशन सिंदूर से बढ़ी मिसाइल की विश्वसनीयता

जोशी ने कहा कि ब्रहमोस की प्रतिष्ठा पिछले 25 वर्षों के परीक्षण, विकास और तैनाती के कारण बनी है। उन्होंने दावा किया कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान इस मिसाइल का वास्तविक युद्ध परिस्थिति में उपयोग किया गया और यह पूरी तरह सफल रहा। उनके मुताबिक सामान्य तौर पर मिसाइलों का परीक्षण नियंत्रित परिस्थितियों में किया जाता है, लेकिन यह पहली बार था जब किसी निर्मित मिसाइल का प्रत्यक्ष युद्ध स्थिति में इस्तेमाल हुआ। उन्होंने कहा कि इस सफलता ने दुनियाभर में ब्रहमोस की विश्वसनीयता को मजबूत किया है। ब्रहमोस को दुनिया की सबसे तेज सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलों में गिना जाता है और इसकी सटीक मारक क्षमता इसे विशेष बनाती है।

वियतनाम समेत कई देशों से बातचीत जारी

ब्रहमोस एयरोस्पेस प्रमुख ने यह भी बताया कि वियतनाम के साथ मिसाइल निर्यात समझौता अंतिम चरण में पहुंच चुका है। उन्होंने कहा कि कुछ जरूरी मंजूरियां बाकी हैं, जिनके बाद यह समझौता पूरा हो सकता है। इसके अलावा पूर्वी और पश्चिमी क्षेत्रों के कई देशों के साथ भी बातचीत चल रही है। भारत सरकार आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत रक्षा निर्माण और रक्षा निर्यात को लगातार बढ़ावा दे रही है। ऐसे में ब्रहमोस भारत के सबसे महत्वपूर्ण रक्षा निर्यात उत्पादों में शामिल हो चुकी है। विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि रूस स्वयं इस मिसाइल को अपनाता है तो इससे वैश्विक रक्षा बाजार में भारत की स्थिति और मजबूत होगी।