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अलवर. रेलवे स्टेशन के समीप और पर्यटन कार्यालय के निकट स्थिति ऐतिहासिक इमारत देखरेख के अभाव में अपनी आभा खोने लगी है। फतेहजंग गुंबद के सबसे ऊपर वाले भाग का हिस्सा कभी भी गिर सकता है। इससे यहां आने वाले पर्यटक भी हादसे का शिकार हो सकते हैं। फिलहाल यहां पर्यटकों के आवागमन पर रोक लगा दी गई है।
इस इमारत का निर्माण खानजादा फतहजंग खान की स्मृति में वर्ष 1547 में कराया गया था। सेनापति फतेहजंग खान, हसन खां मेवाती के भतीजे थे और उनकी सेना के बेहतरीन सेनापति थे। यह इमारत पांच मंजिला है और इसमें अरबी व फारसी में कुरान की आयातें लिखी गई है। चारों कोनों में ऊपर चढऩे के लिए सीढियां बनाई गई है।
नहीं ली सुध
अलवर में 2 मई को आए तुफान के दौरान फतेहजंग गुंबद का सबसे ऊपरी हिस्सा गिर गया था। तुफान के तीन महिने गुजर चुके हैं। इसके बाद भी पुरातत्व विभाग ने आज तक इसकी सुध नहीं ली है। तुफान के दौरान गुंबद का गिरा हुआ हिस्सा अधर में ही अटका हुआ है। तूफान या बारिश की वजह से यह हिस्सा कभी भी गिर सकता है। गुंबद कीे दीवारों की परतें भी अब उखडऩे लगी है औरन् दीवारों से चूना झडऩे लगा है। परतें उतरने से इमारत की सुंदरता भी खराब हो रही है।
मस्जिद के अंदर प्रवेश के लिए बनाए गए मुख्यद्वार की छत भी गिराऊ हालत में हैं। ऊपर से गुंबद के गिरने के बाद इस छत पर जोर आने से पटिटयां खिसक गई थी जिनमें दरारें आ गई है। बरसात के चलते अब इनमें अब पानी टपकने लगा है।
अतिक्रमण से घिरी हुई है इमारत
जिला प्रशासन की ओर से शहर में समय समय पर अतिक्रमण हटाने के लिए अभियान चलाया जा रहा है। लेकिन पुरातत्व एवं संग्रहालय विभाग की संरक्षित इमारतों में शामिल इस इमारत को अतिक्रमण मुक्त करने का कोई प्रयास नहीं किया गया । इमारत के बाहर दुकानदारों ने वर्षो से अतिक्रमण किया गया हुआ है। इमारत के अंदर और बाहर कई महिनों से सफाई नहीं हुई है।