अलवर

FCI की खरीद सीमा बनी किसानों की मुसीबत: बंपर पैदावार के बाद भी औने-पौने दाम में फसल बेचने को मजबूर अन्नदाता

एक ओर जहां इस सीजन में गेहूं की बंपर पैदावार हुई है, वहीं दूसरी ओर सरकारी नियमों की बेड़ियों में जकड़े किसान अपनी मेहनत का सही मूल्य पाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं।

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Apr 21, 2026
representative picture (AI)

एक ओर जहां इस सीजन में गेहूं की बंपर पैदावार हुई है, वहीं दूसरी ओर सरकारी नियमों की बेड़ियों में जकड़े किसान अपनी मेहनत का सही मूल्य पाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। भारतीय खाद्य निगम (FCI) द्वारा निर्धारित प्रति बीघा खरीद की सीमा ने किसानों की आर्थिक कमर तोड़ दी है, जिसके चलते उन्हें अपनी उपज का एक बड़ा हिस्सा खुले बाजार में एमएसपी (MSP) से कम कीमत पर बेचने को मजबूर होना पड़ रहा है।

खरीद सीमा बनी किसानों की मुसीबत

FCI ने गेहूं खरीद के लिए प्रति बीघा 25 मण (10 क्विंटल) की सीमा निर्धारित की है। हालांकि, इस साल उन्नत बीजों और बेहतर मौसम के कारण किसानों के खेतों में प्रति बीघा 35 से 37 मण (14 से 15 क्विंटल) तक पैदावार हो रही है। इस नियम के कारण, किसान अपनी कुल उपज का केवल एक हिस्सा ही सरकारी केंद्रों पर बेच पा रहे हैं। शेष बचा 4 से 5 क्विंटल प्रति बीघा गेहूं उन्हें खुले बाजार में बेचने को मजबूर होना पड़ रहा है।

आर्थिक नुकसान झेल रहा किसान

बाजार में फसल बेचने पर किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) से 250 से 300 रुपये प्रति क्विंटल तक कम दाम मिल रहे हैं। छोटे और सीमांत किसानों के लिए यह स्थिति और भी विकट है। उनके पास अपनी उपज को लंबे समय तक सुरक्षित रखने के लिए पर्याप्त भंडारण क्षमता नहीं है और न ही वे तात्कालिक जरूरतों के लिए फसल को रोक कर रख सकते हैं। इस आर्थिक दोहरे मार ने उनकी कमर तोड़ दी है।

आंकड़ों की विसंगति का दंश

जब इस संबंध में FCI अधिकारियों से सवाल किया गया, तो उन्होंने स्पष्ट किया कि खरीद सीमा का निर्धारण कृषि विभाग द्वारा बताए गए औसत उत्पादन आंकड़ों के आधार पर पोर्टल पर ऑटो-अपडेट होता है। वहीं, किसानों का आरोप है कि कृषि विभाग के आंकड़े काफी पुराने हैं और वर्तमान बंपर पैदावार की वास्तविक स्थिति को नहीं दर्शाते हैं। पोर्टल पर गलत डेटा फीड होने के कारण किसानों को अपनी मेहनत का फल नहीं मिल पा रहा है।

किसानों ने उठाई मांग
अपनी बदहाली को देखते हुए अलवर के किसानों ने सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। किसानों का कहना है कि:

  • प्रति बीघा खरीद सीमा को वास्तविक उत्पादन के अनुपात में बढ़ाया जाए।
  • पोर्टल पर डेटा को अपडेट कर फसल के नए आकलन के आधार पर खरीद की जाए।
  • अतिरिक्त उपज की सुगम खरीद सुनिश्चित करने के लिए विशेष खरीद केंद्र खोले जाएं।

न्यूनतम समर्थन मूल्य घोषित होने का अर्थ है दाने-दाने की खरीद करना। यदि सरकार उस खरीद में किसी भी प्रकार की मात्रात्मक प्रतिबंध लगाती है तो यह न्यूनतम समर्थन मूल्य की सार्थकता पर प्रश्न चिन्ह है। भारत सरकार की ओर से संसद में कहा गया है कि दाने-दाने की खरीद करेंगें। सरकार की कथनी-करनी में अंतर आ रहा है - रामपाल जाट, अध्यक्ष, राष्ट्रीय किसान महापंचायत

Published on:
21 Apr 2026 11:54 am
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