अलवर

पालनहार योजना बनी अनाथों का सहारा

अलवर. सामाजिक न्याय एवं आधिकारिता विभाग की ओर से चलाई जा रही पालनहार योजना में अलवर जिले में 16 हजार 598 के लगभग बच्चों को लाभांवित किया जा रहा है।

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May 22, 2026

अलवर जिले में 16 हजार 598 बच्चों को मिल रही आर्थिक सहायता

अलवर. सामाजिक न्याय एवं आधिकारिता विभाग की ओर से चलाई जा रही पालनहार योजना में अलवर जिले में 16 हजार 598 के लगभग बच्चों को लाभांवित किया जा रहा है।

विभाग के उपनिदेशक लक्ष्मण सिंह ने बताया कि माता पिता की मृत्यु के बाद बच्चों का पालन पोषण करना मु​श्किलहेाता है। बच्चे दूसरों के लिए बोझ बन जाते हैं। ऐसे में सरकार की ओर से योजना में दी जा रही आ​​र्थिक सहायता बहुत राहत देती है।

इस योजना के तहत अनाथ बच्चों के अलावा, मृत्युदंड या आजीवन कारवास प्राप्त माता पिता के बच्चे, विधवा, तलाकशुदा, परित्यकता, पुनर्विवाहित माताओं के बचचे, एचआईवी, कुष्ठरोग व सिलिकोसिस से प्रभावित बच्चों को आर्थिक सहायता दी जाती है। उमरैण में सबसे ज्यादा 3381 बच्चे इस योजना का लाभ ले रहे हैं। गोविंदगढ़ में सबसे कम 601 बच्चे इस योजना का लाभ ले रहे हैं।

शैक्ष​णिक प्रमाण पत्र व भौतिक सत्यापन है जरुरी

योजना के तहत लाभार्थियों को प्रत्येक शैक्षणिक सत्र की शुरुआत जुलाई में 0 से 6 वर्ष तक के बालक- बालिकाओं का आंगनबाड़ीकेन्द्र का पंजीकरण प्रमाण पत्र और 6 से 18 वर्ष का स्कूल में अध्यनरत होने का प्रमाण पत्र नजदीकी ई-मित्र से अपलोड करवाकर नवीनीकरण करवाया जाना आवश्यक है। पालनहार नवीनीकरण नजदीकी ई-मित्र के साथ-साथ पालनहार योजना की मोबाइल एप्लिकेशन द्वारा निशुल्क कहीं भी कभी भी किया जा सकता है। शैक्षणिक सत्र में नवीनीकरण के अभाव में लाभार्थियों के लाभ की राशि रुक सकती है

फैक्ट फाइल

ब्लॉक् पालनहार योजना का लाभ ले रहे बच्चे

कठूमर 1276 2391

लक्ष्मणगढ़ 877 1674

राजगढ़ 1034 1914

रामगढ़ 1163 2308

रैणी 639 1181

थानागाजी 1276 2392

उमरैण 1956 3381

गोविंदगढ़ 323 601

मालाखेड़ा 401 756

यह मिलती है राशि

इस योजना के तहत अनाथ श्रेणी के 0 से 6 वर्ष तक के बच्चों को 1500 रुपए और 6 से 18 वर्ष तक के स्कूली बच्चों को 2500 रुपए प्रतिमाह दिए जाते हैं। अन्य श्रेणियों में 6 वर्ष तक के बच्चों को 2500 रुपए दिए जाते हैं। अन्य श्रेणियों में 6 वर्ष तक 750 रुपए और स्कूली स्तर पर 1500 रुपए की सहायता मिलती है। इसके साथ ही हर वर्ष कपडे़ और किताबों के लिए 2000 रुपए का अतिरिक्त भुगतान भी किया जाता है।

Published on:
22 May 2026 12:18 pm
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