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दिल्ली में ट्रकों की चक्का जाम हड़ताल: अलवर से मार्बल पाउडर की सप्लाई रुकी, राशन-फल भी होंगे महंगे

दिल्ली में पर्यावरण क्षतिपूर्ति शुल्क (ECC) बढ़ाने के विरोध में ट्रक ऑपरेटरों ने चक्का जाम कर दिया है। गुरुवार से शुरू हुई इस हड़ताल के कारण दिल्ली बॉर्डर पर बाहरी राज्यों के ट्रकों की एंट्री पूरी तरह बंद है। इसका सीधा और बड़ा असर पड़ोसी जिले अलवर के कारोबार और आम जनता पर पड़ने लगा है।

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delhi truck strike

representative picture (patrika)

दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण को काबू करने के लिए सरकार ने जो कड़े कदम उठाए हैं, अब उनका विरोध शुरू हो गया है। ट्रक ऑपरेटर्स ने पर्यावरण क्षतिपूर्ति शुल्क (ECC) की दरों में बढ़ोतरी और बीएस-6 वाहनों पर भी यह टैक्स लगाने के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। गुरुवार से दिल्ली में ट्रकों की बड़ी हड़ताल शुरू हो गई है, जिससे दिल्ली से सटे राजस्थान के अलवर जिले की रफ्तार पर भी ब्रेक लग गया है।

इस हड़ताल का सबसे पहला झटका व्यापार को लगा है। अलवर से भारी मात्रा में दिल्ली जाने वाला मार्बल पाउडर वहीं अटक गया है। दूसरी तरफ, दिल्ली से अलवर आने वाले किराने के सामान की सप्लाई भी ठप हो गई है। जानकारों का कहना है कि यह हड़ताल कम से कम तीन दिन चल सकती है। अगर ऐसा हुआ तो आने वाले दिनों में रोजमर्रा के सामान की कमी हो जाएगी और महंगाई का झटका लगना तय है।

फल-सब्जियों के दामों पर असर

अलवर में ज्यादातर फलों की सप्लाई दिल्ली के रास्ते ही होती है। ट्रकों के पहिए थमने से फलों की खेप रास्ते में ही फंस गई है। वहीं, अलवर से जो ताजी सब्जियां और खाने-पीने का दूसरा सामान दिल्ली भेजा जाता है, उसकी सप्लाई भी पूरी तरह रुक गई है। इससे जहां अलवर के किसानों और व्यापारियों को नुकसान हो रहा है, वहीं दिल्ली-एनसीआर में सब्जियों के दाम बढ़ने की आशंका गहरा गई है।

BS-4 ट्रकों पर बैन से बढ़ी नाराजगी

प्रदूषण को रोकने के लिए दिल्ली में आगामी नवंबर से बीएस-4 (BS-IV) वाहनों के प्रवेश पर भी रोक लगाने की तैयारी है। ट्रक मालिकों में इसे लेकर भारी गुस्सा है। ऑपरेटर्स का कहना है कि साल 2020 तक रजिस्टर्ड हुए करीब 17 लाख वाहन इस फैसले से कबाड़ हो जाएंगे। कोरोना काल की वजह से ये ट्रक पहले ही केवल चार साल ठीक से चल पाए हैं, ऐसे में इन पर बैन लगाना मालिकों की कमर तोड़ देगा। चूंकि अलवर एनसीआर का हिस्सा है, इसलिए इस फैसले की सबसे ज्यादा मार यहीं के ट्रांसपोर्टर्स पर पड़ेगी।

क्या है ट्रक ऑपरेटरों की मांग?

हड़ताल कर रहे ट्रक ऑपरेटरों का साफ कहना है कि प्रदूषण टैक्स (ECC) केवल उन ट्रकों से वसूला जाना चाहिए जो दिल्ली के रास्ते दूसरे राज्यों में जाते हैं। जो ट्रक दिल्ली के लोगों के लिए राशन, फल, सब्जियां और अन्य जरूरी सामान लेकर आ रहे हैं, उन्हें इस टैक्स से पूरी तरह बाहर रखा जाना चाहिए। फिलहाल, इस हड़ताल से दिल्ली-अलवर रूट पर ट्रकों की लंबी कतारें लग गई हैं और आम जनता को सप्लाई चेन बिगड़ने का डर सता रहा है।

अलवर से अगले तीन दिन तक एक भी ट्रक अलवर नहीं जाएगा। ट्रक ऑपरेटर्स की हड़ताल के चलते प्रवेश निषेध किया गया है। कई सामानों की सप्लाई अटकेगी - हरमीत सिंह मेहंदीरत्ता, अध्यक्ष, अलवर ट्रक ऑपरेटर एसोसिएशन