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RGHS कार्ड धारकों के लिए बड़ी राहत, निजी अस्पतालों में फिर शुरू हुआ कैशलेस इलाज

राजस्थान के लाखों सरकारी कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए एक बहुत अच्छी खबर है। सरकार और इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) के बीच बातचीत सफल होने के बाद, पिछले 38 दिनों से निजी अस्पतालों में बंद पड़ी आरजीएचएस (RGHS) के तहत कैशलेस इलाज की सुविधा गुरुवार से फिर से बहाल हो गई है।

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राजस्थान गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम (RGHS) को लेकर सरकार और डॉक्टरों के बीच चल रहा गतिरोध आखिरकार खत्म हो गया है। पिछले करीब डेढ़ महीने से निजी अस्पतालों में इलाज के लिए दर-दर भटक रहे मरीजों को गुरुवार से बड़ी राहत मिल गई है। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) और सरकार के बीच हुई एक सकारात्मक बैठक के बाद निजी अस्पतालों ने योजना का अपना बहिष्कार वापस ले लिया है। अब मरीज पहले की तरह ही अपने आरजीएचएस कार्ड पर कैशलेस इलाज करवा सकेंगे।

क्यों बंद था इलाज और कैसे बनी बात?

आईएमए (IMA) के जिलाध्यक्ष डॉ. विजयपाल यादव ने बताया कि स्टेट आईएमए के आह्वान पर अलवर सहित पूरे प्रदेश के निजी अस्पतालों में गत 14 अप्रैल से आरजीएचएस योजना का पूरी तरह बहिष्कार किया जा रहा था। इस दौरान मरीजों को प्राइवेट डॉक्टरों को अपनी जेब से भारी-भरकम फीस और इलाज का खर्च देना पड़ रहा था।

लेकिन बुधवार को स्टेट आईएमए के पदाधिकारियों और सरकार के उच्च अधिकारियों के बीच एक अहम बैठक हुई। इस बैठक में डॉक्टरों की पुरानी मांगों पर सहमति बन गई है। सरकार ने भरोसा दिया है कि नई एसओपी (SOP) में जरूरी बदलाव किए जाएंगे, अस्पतालों के बकाया भुगतान के लिए एक तय टाइमलाइन (समय-सीमा) बनाई जाएगी, और बार-बार उठने वाली क्वेरी व पेनल्टी सिस्टम को पूरी तरह पारदर्शी (ट्रांसपेरेंट) बनाया जाएगा। साथ ही, लंबे समय से अटका हुआ पुराना पेमेंट भी जल्द जारी कर दिया जाएगा। सरकार ने डॉक्टरों को 10 दिन के भीतर संशोधित एसओपी जारी करने का लिखित भरोसा दिया है।

अलवर के हजारों परिवारों को मिलेगी राहत

इस फैसले का सबसे बड़ा फायदा आम जनता, सरकारी कर्मचारियों और बुजुर्ग पेंशनर्स को होने वाला है। अकेले अलवर जिले की बात करें, तो यहाँ आरजीएचएस योजना के तहत करीब 50 प्राइवेट अस्पताल रजिस्टर्ड हैं, जिनमें से लगभग 35 अस्पताल अकेले अलवर शहर में ही चल रहे हैं। पिछले 38 दिनों से इन अस्पतालों में सेवाएं बंद होने के कारण गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीजों और उनके परिजनों को भारी मानसिक और आर्थिक परेशानी झेलनी पड़ रही थी। अब अस्पतालों के काउंटर पर दोबारा आरजीएचएस की कतारें दिखने लगी हैं और लोगों ने इस फैसले के बाद राहत की सांस ली है।