असम विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद कांग्रेस खेमे से बड़ी खबर आ रही है। पूर्व केंद्रीय मंत्री और कद्दावर नेता जितेंद्र सिंह ने असम में पार्टी की हार की पूरी जिम्मेदारी लेते हुए कांग्रेस महासचिव और राज्य प्रभारी के पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने सोशल मीडिया के जरिए यह जानकारी साझा की।
राजस्थान के अलवर से ताल्लुक रखने वाले और गांधी परिवार के भरोसेमंद माने जाने वाले जितेंद्र सिंह ने एक बड़ा कदम उठाया है। असम के चुनावी नतीजों में कांग्रेस को मिली करारी शिकस्त के बाद उन्होंने अपना इस्तीफा पार्टी आलाकमान को सौंप दिया है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि वह इन नतीजों से बेहद आहत हैं और एक प्रभारी होने के नाते वह इस हार की नैतिक जिम्मेदारी अपने कंधों पर लेते हैं। उन्होंने हार की जिम्मेदारी लेते हुए कांग्रेस महासचिव और राज्य प्रभारी के पद से इस्तीफा दे दिया है।
जितेंद्र सिंह ने सोशल मीडिया पर अपनी भावनाओं को व्यक्त करते हुए लिखा कि चुनाव के परिणाम उम्मीद के मुताबिक नहीं रहे और यह काफी निराशाजनक हैं। उन्होंने कहा कि हमने असम की जनता का विश्वास जीतने के लिए दिन-रात मेहनत की, लेकिन हमारे तमाम प्रयासों के बावजूद हम लोगों की उम्मीदों पर खरे नहीं उतर पाए। लोकतंत्र में जनता का फैसला सर्वोपरि होता है और मैं इस जनादेश को स्वीकार करता हूं।
अपने इस्तीफे के साथ ही उन्होंने असम के जमीनी कार्यकर्ताओं और स्थानीय नेताओं को भी याद किया। उन्होंने कहा कि असम में बिताया गया समय उनके लिए यादगार रहा। कार्यकर्ताओं ने जिस तरह का प्यार और सम्मान उन्हें दिया, वह उसके लिए हमेशा ऋणी रहेंगे। जितेंद्र सिंह ने मुश्किल समय में साथ खड़े रहने वाले हर उस चेहरे का शुक्रिया अदा किया जिसने पार्टी के विजन को घर-घर तक पहुँचाने में मदद की।
इस्तीफे का मतलब राजनीति से दूरी बनाना नहीं है, इस बात को भी उन्होंने स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि वह कांग्रेस पार्टी की विचारधारा और मूल्यों के प्रति पूरी तरह समर्पित हैं। उन्होंने संदेश दिया कि भले ही वह इस पद से हट रहे हैं, लेकिन पार्टी जिस भी रूप में उनकी सेवाओं का उपयोग करना चाहेगी, वह हमेशा तत्पर रहेंगे। उन्होंने आलाकमान का धन्यवाद करते हुए कहा कि उन्हें असम की सेवा करने का जो मौका मिला और उन पर जो भरोसा जताया गया, वह उनके लिए गर्व की बात है।
जितेंद्र सिंह का इस्तीफा देना यह दर्शाता है कि अब पार्टी के भीतर जवाबदेही का दौर शुरू हो गया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उनके इस कदम से दूसरे राज्यों के प्रभारियों पर भी नैतिक दबाव बढ़ेगा। अब देखना यह है कि कांग्रेस आलाकमान उनके इस इस्तीफे को स्वीकार करता है या उन्हें किसी नई जिम्मेदारी के साथ फिर से मैदान में उतारता है। फिलहाल, असम कांग्रेस के लिए यह एक बड़े नेतृत्व परिवर्तन का संकेत है।