जनवरी माह में मलमास और शुक्र अस्त होने के कारण शादी-ब्याह सीमित रहे, लेकिन फरवरी की शुरुआत के साथ ही विवाह सीजन पूरे जोर पर लौट आया है।
जनवरी माह में मलमास और शुक्र अस्त होने के कारण शादी-ब्याह सीमित रहे, लेकिन फरवरी की शुरुआत के साथ ही विवाह सीजन पूरे जोर पर लौट आया है। फरवरी माह में एक दर्जन से अधिक वैवाहिक मुहूर्त होने के कारण न केवल शहर का स्थानीय बाजार गुलजार हो गया है, बल्कि इससे जुड़े राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के कारोबार को भी गति मिलने की उम्मीद है।
फरवरी में सावों की अधिकता के चलते शहर के 70 से अधिक मैरिज होम पहले ही बुक हो चुके हैं। इसके साथ ही होटल, गेस्ट हाउस और रिसॉर्ट्स में भी बुकिंग तेज हो गई है। कई परिवार डेस्टिनेशन वेडिंग और आउटस्टेशन मेहमानों के लिए ट्रैवल पैकेज बुक करवा रहे हैं, जिससे ट्रांसपोर्ट और हॉस्पिटैलिटी सेक्टर को भी फायदा मिल रहा है।
विवाह सीजन शुरू होते ही कपड़ा बाजार, सर्राफा बाजार, इलेक्ट्रॉनिक्स और फर्नीचर मार्केट में ग्राहकों की संख्या बढ़ गई है। सोने-चांदी के आभूषण, डिजाइनर कपड़े, मोबाइल फोन, घरेलू इलेक्ट्रॉनिक सामान और गिफ्ट आइटम की मांग में तेजी देखी जा रही है। व्यापारियों के अनुसार फरवरी से अप्रैल तक बाजार में करोड़ों रुपए का कारोबार होने की संभावना है।
शादी समारोहों में अब विदेशी फूल, इंपोर्टेड सजावटी सामान, थाई और डच फूलों की सजावट, चाइनीज लाइटिंग और इंटरनेशनल थीम डेकोरेशन का चलन बढ़ रहा है। इसके चलते दिल्ली, मुंबई के साथ-साथ दुबई, थाईलैंड और चीन से आयात होने वाले डेकोरेशन आइटम्स की मांग भी बढ़ी है। कैटरिंग में भी इंटरनेशनल कुजीन और विदेशी मेन्यू की डिमांड देखने को मिल रही है।
शादी सीजन का असर डिजिटल सेक्टर पर भी साफ नजर आ रहा है। प्री-वेडिंग शूट, सिनेमैटिक वीडियोग्राफी, ड्रोन शूट और सोशल मीडिया कंटेंट पैकेज की मांग बढ़ गई है। कई फोटोग्राफर और वीडियो ग्राफर बाहर के शहरों से भी बुक किए जा रहे हैं, जिससे यह कारोबार अब लोकल से निकलकर नेशनल और ग्लोबल ट्रेंड से जुड़ चुका है।
इस वर्ष फरवरी से मई तक वैवाहिक मुहूर्त रहेंगे। इसके अलावा कई अबूझ मुहूर्त भी हैं, जिनमें बिना पंचांग देखे विवाह किए जाते हैं। इन मुहूर्तों में भी बड़ी संख्या में विवाह और सामूहिक विवाह समारोह आयोजित होंगे।
फरवरी और अप्रैल माह में होने वाले सामूहिक विवाह समारोहों से न केवल सामाजिक समरसता को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि इससे जुड़े कपड़ा, भोजन, टेंट, ट्रांसपोर्ट और सजावट जैसे व्यवसायों को भी बड़े स्तर पर लाभ होगा।