अलवर

प्रमोशन का ‘अनोखा’ खेल: 701 लिपिक बनेंगे UDC, गबन के दोषी को बर्खास्तगी की जगह पदोन्नति की तैयारी

486 कनिष्ठ लिपिकों (LDC) को उच्च श्रेणी लिपिक (UDC) के पद पर प्रमोट करने के लिए स्थायी वरिष्ठता सूची जारी की है। लेकिन इस सूची में एक ऐसा नाम शामिल है, जिसने पूरी प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान लगा दिए हैं।

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May 05, 2026
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अलवर जिला परिषद अलवर में इन दिनों पदोन्नति की एक सूची चर्चा और विवादों के केंद्र में है। परिषद ने जिले के 701 कनिष्ठ लिपिकों (LDC) को उच्च श्रेणी लिपिक (UDC) के पद पर प्रमोट करने के लिए स्थायी वरिष्ठता सूची जारी की है। लेकिन इस सूची में एक ऐसा नाम शामिल है, जिसने पूरी प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान लगा दिए हैं। एक तरफ जहां अधिकारी रिकॉर्ड खंगालने की बात कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ 5 साल की जेल काट चुके और गबन के दोषी लिपिक को बर्खास्त करने के बजाय पदोन्नति देने की तैयारी चल रही है।

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क्या है पूरा मामला?

जिला परिषद के अधिकारियों ने वर्ष 2016 की वरिष्ठता सूची के आधार पर ताजा लिस्ट तैयार की है। विभाग ने सभी विकास अधिकारियों (BDO) से संबंधित लिपिकों का रिकॉर्ड मांगा है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि किसी पर कोई आपराधिक मामला या भ्रष्टाचार का केस तो नहीं चल रहा। हैरानी की बात यह है कि इसी सूची में गोविंदगढ़ पंचायत समिति के एक ऐसे लिपिक का नाम भी शामिल है, जिसे 85 लाख रुपये के गबन मामले में सजा हो चुकी है और वह 5 साल जेल में बिता चुका है।

बर्खास्तगी की फाइल दबी, प्रमोशन की लिस्ट चमकी

नियमों के मुताबिक, गबन और सजायाफ्ता कर्मचारी को सेवा से बर्खास्त किया जाना चाहिए। जानकारी के अनुसार, करीब दो महीने पहले गोविंदगढ़ बीडीओ ने इस लिपिक का पूरा विवरण जिला परिषद को भेजा था। बीडीओ ने स्पष्ट रूप से लिपिक की बर्खास्तगी की कार्रवाई के लिए परिषद को पत्र लिखा था। लेकिन हैरानी की बात यह है कि जिस कर्मचारी को नौकरी से बाहर का रास्ता दिखाया जाना चाहिए था, उसका नाम अब पदोन्नति की सूची में चमक रहा है।

प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल

यह मामला सामने आने के बाद जिला परिषद के गलियारों में सुगबुगाहट तेज हो गई है। कर्मचारियों के बीच यह चर्चा का विषय बना हुआ है कि जब बीडीओ ने पहले ही बर्खास्तगी का प्रस्ताव भेज दिया था, तो वरिष्ठता सूची तैयार करते समय इस गंभीर तथ्य को नजरअंदाज कैसे किया गया?

क्या यह महज एक मानवीय चूक है या फिर जानबूझकर दोषी कर्मचारी को फायदा पहुंचाने की कोशिश? फिलहाल, जिला परिषद के अधिकारियों का कहना है कि सभी बीडीओ से रिकॉर्ड मांगे गए हैं और किसी भी दागी या सजायाफ्ता कर्मचारी को पदोन्नत नहीं किया जाएगा। हालांकि, सूची में नाम आने मात्र से ही विभाग की पारदर्शिता पर उंगलियां उठने लगी हैं। अब देखना होगा कि क्या प्रशासन अपनी गलती सुधारते हुए दोषी पर कार्रवाई करता है या यह पदोन्नति यूं ही जारी रहती है।

संबंधित लिपिक निलंबित चल रहा है। बर्खास्तगी की कार्रवाई के लिए जिला परिषद को पूर्व में पत्र लिखा जा चुका है। कार्रवाई प्रक्रियाधीन है - रमेश गुर्जर, बीडीओ गोविंदगढ़

Updated on:
05 May 2026 12:19 pm
Published on:
05 May 2026 12:12 pm
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