अलवर

Alwar News: सामान्य चिकित्सालय में 40 बेड का न्यू मेडिकल वार्ड तैयार, स्टाफ नहीं… मरीजों की देखभाल कैसे होगी?

अलवर के राजीव गांधी सामान्य चिकित्सालय में मरीजों के लिए 40 नए बेड शुरू करने की तैयारी है, लेकिन इन पर सेवाएं देने के लिए जरूरी नर्सिंग स्टाफ की तैनाती अब तक नहीं हुई है। 89 नर्सिंगकर्मियों की प्रशासनिक और वित्तीय स्वीकृति के बावजूद पदस्थापन नहीं होने से अस्पताल प्रशासन के सामने नई चुनौती खड़ी हो गई है।
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Aug 23, 2026
rajiv gandhi hospital alwar
सामान्य चिकित्सालय अलवर (फोटो - पत्रिका)

राजीव गांधी सामान्य चिकित्सालय में मरीजों के लिए 40 नए बेड शुरू करने की तैयारी है, लेकिन इन बेड पर मरीजों की देखभाल कौन करेगा, इसका जवाब अस्पताल के पास नहीं है। नए मेडिकल वार्ड के संचालन की तैयारी के बीच 89 नर्सिंगकर्मियों की प्रशासनिक एवं वित्तीय स्वीकृति होने के बावजूद उनका पदस्थापन नहीं किया गया है। ऐसे में सवाल है कि बेड तैयार करने की रफ्तार तेज है तो स्टाफ की तैनाती क्यों अटक गई?

राजस्थान मेडिकल एजुकेशन सोसायटी की ओर से राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय से संबंधित 89 नर्सिंगकर्मियों की स्वीकृति मिलने के बावजूद स्टाफ उपलब्ध नहीं कराया गया है। राजस्थान नर्सेज एसोसिएशन ने इसे लेकर अस्पताल प्रशासन को ज्ञापन दिया है। एसोसिएशन का कहना है कि नए वार्ड को शुरू करने से पहले पर्याप्त नर्सिंग स्टाफ उपलब्ध होना जरूरी है। चिंता इसलिए भी बड़ी है कि अस्पताल पहले से ही कई वार्डों में वैकल्पिक व्यवस्था के सहारे सेवाएं चला रहा है।

स्वीकृति है तो नियुक्ति क्यों नहीं?

नर्सिंग एसोसिएशन का सवाल है कि जब 89 नर्सिंगकर्मियों की प्रशासनिक और वित्तीय स्वीकृति हो चुकी है तो पदस्थापन में देरी किस स्तर पर है। संगठन के अनुसार पूर्व में भी हटाए गए स्टाफ को वापस लगाने तथा स्वीकृत स्टाफ उपलब्ध कराने की मांग की गई थी। संगठन पदाधिकारियों का कहना है कि एक तरफ मरीजों का दबाव बढ़ रहा है और नए वार्ड खोले जा रहे हैं, दूसरी तरफ स्वीकृत स्टाफ की तैनाती नहीं हो रही।

अस्पताल में पहले भी स्टाफ की कमी और वैकल्पिक व्यवस्थाओं को लेकर सवाल उठते रहे हैं। अब सवाल सिर्फ 40 बेड शुरू करने का नहीं, बल्कि उन्हें सुरक्षित तरीके से चलाने का है। यदि नर्सिंग स्टाफ और जरूरी संसाधन साथ नहीं आए तो नए बेड मरीजों की वास्तविक सुविधा के बजाय अस्पताल की कागजी क्षमता बढ़ाने का आंकड़ा बनकर रह जाएंगे।


पहले से चल रहे वार्डों पर भी दबाव

अस्पताल के सीसीयू, एसआइसीयू, रामाश्रय, एमडीआर, ऑब्जर्वेशन, कैंसर डे केयर और अतिरिक्त आइ वार्ड में भी वैकल्पिक व्यवस्था की जा रही है। ऐसे में यदि इन्हीं वार्डों से नर्सिंगकर्मियों को हटाकर 40 बेड के नए मेडिकल वार्ड में लगाया गया तो पहले से चल रही सेवाओं पर सीधा असर पड़ सकता है।

मेडिकल कॉलेज में नर्स-II के 8 स्वीकृत पदों पर राजस्थान कॉन्ट्रैक्चुअल हायरिंग रूल्स, 2022 के तहत राजमेस की निर्धारित प्रक्रिया से नियुक्तियां की जा चुकी हैं। राजमेस ने नर्सिंग के 89 नए पद सृजित किए हैं, जिन पर निर्धारित प्रक्रिया के तहत भर्ती की जाएगी - डाॅ. इन्दू वर्मा, प्राचार्य, राजकीय मेडिकल कॉलेज, अलवर

नए वार्ड को शुरू करने से पहले पर्याप्त नर्सिंग स्टाफ, चिकित्सकीय संसाधन और जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराना जरूरी है। तभी 40 नए बेड मरीजों के लिए वास्तविक राहत साबित होंगे, वरना यह महज आंकड़ों में क्षमता बढ़ाने तक सीमित रह जाएंगे।” - राजपाल सिंह यादव, कार्यकारी प्रदेशाध्यक्ष, राजस्थान नर्सेज एसोसिएशन

अस्पताल में 587 बेड स्वीकृत हैं, जबकि मरीजों के दबाव को देखते हुए 100 अतिरिक्त बेड लगाए गए हैं। ऐसे में नर्सिंग स्टाफ की आवश्यकता लगातार बनी हुई है। यदि 8-10 नर्सिंगकर्मी भी उपलब्ध हो जाते हैं, तो नए मेडिकल वार्ड को शुरू किया जा सकता है - डॉ. प्रवीण शर्मा, पीएमओ, जिला अस्पताल।

Updated on:
23 Aug 2026 11:48 am
Published on:
23 Aug 2026 11:48 am