अलवर

बाघ-बघेरे करने लगे सरिस्का से पलायन, क्या है वजह, जानिए पूरी खबर

सरिस्का बाघ परियोजना में 29 गांव, प्राथमिकता में 9 गांवों का विस्थापनपैकेज व परिवारों की गणना बड़ी समस्या, ग्रामीण नहीं दे रहे सहमति पत्र
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Mar 20, 2018
Tiger to flee from Sariska, what is the reason, know the news

ग्रामीण ही नहीं मोटे लालच में जंगल में जड़ जमाए बैठे लोग सरिस्का छोडऩे को तैयार नहीं हो रहे, नतीजतन बाघ-बघेरे ही अब जंगल से पलायन करने लगे हैं। तभी तो इन दिनों सरिस्का बाघ परियोजना में बाघिन एसटी-5 को खोजने की स्थिति आई है।
सरिस्का बाघ परियोजना में 29 गांव बसे हैं, इनमें से तीन गांव बघानी, रोटक्याला व उमरी गांवों का पूरी तरह विस्थापन हो चुका है, वहीं हरिपुरा, किरासका, कांकवाड़ी, देवरी, सुकोला व डाबली गांवों के ज्यादातर परिवारों का विस्थापन होना अभी शेष है।
सरकार देती है जंगल छोडऩे वाले परिवारों को पैकेज

सरकार की ओर से सरिस्का में बसे गांवों के विस्थापन पर पैकेज देने का प्रावधान है। फिलहाल दो तरह के पैकेज ग्रामीणों को दिए जा रहे हैं, इनमें एक नकद राशि का भुगतान और जमीन का आवंटन। नकद राशि में प्रत्येक परिवार को 10 दस लाख रुपए देने तथा जमीन में प्रत्येक परिवार को 6 बीघा तैयार कृषि जमीन, 2.50 लाख रुपए नकद एवं आवासीय भूखण्ड देने का प्रावधान है। हालांकि ग्रामीण दोनों ही पैकेज से संतुष्ट नहीं है। ग्रामीणों का कहना है कि इन दिनों जिले में रिहायशी व कृषि भूमि के भाव ज्यादा है, इस कारण 10 लाख रुपए में मकान व कृषि जमीन खरीद पाना मुश्किल है, वहीं भूमि पैकेज में भी मकान बनाने के लिए मिलने वाली 2.50 लाख की राशि को अपर्याप्त मानते हैं।

इसलिए है जरूरी गांवों का विस्थापन

सरिस्का में वन्यजीव स्वच्छंद विचरण करते हैं, ऐसे में कोर एरिया एवं अन्य क्षेत्र में मानवीय गतिविधियां उनके स्वच्छंद विचरण में बाधक बनती है। इसका सीधा नुकसान वन्यजीवों की प्राकृतिक क्रियाओं पर पड़ता है। सरिस्का में मानवीय व्यवधान का परिणाम है कि गत ढाई साल में एक भी नया शावक नहीं दिख सका है। वहीं कभी भालू तो कभी बाघिन जंगल से पलायन को मजबूर हो रही हैं। ग्रामीणों से कर रहे हैं समझाइश
& सरिस्का में विस्थापन की प्रक्रिया में तेजी लाने के लिए ग्रामीणों से समझाइश कर उन्हें जंगल छोड़ अन्यंत्र बसने के फायदे बताए जा रहे हैं। जल्द ही शेष परिवारों को भी विस्थापन के लिए सहमत किया जाएगा।
डॉ. गोविंद सागर भारद्वाज, सीसीएफ, सरिस्का बाघ परियोजना, अलवर।

कहां कितने परिवार हुए सहमत
गांव परिवार विस्थापित प्रक्रियाधीन शेष परिवार
बघानी 21 21 -- --
रोटक्याला 51 51 -- --
उमरी 91 91 -- --
हरिपुरा 74 27 18 29
किरासका 200 119 38 43
कांकवाड़ी 170 134 08 28
देवरी 181 82 -- 99
सुकोला 59 17 19 23
डाबली 126 118 07 01

परिवार की गणना भी बनी समस्या
गांवों के विस्थापन में परिवारों की गणना भी बड़ी समस्या है, इस कारण लोग सरिस्का छोडऩे को सहमत नहीं हो रहे। नियमानुसार 21 वर्ष की आयु पूरी कर चुके व्यक्ति को परिवार मानने का प्रावधान है। लेकिन विस्थापन योग्य ज्यादातर परिवारों में लोग इससे छोटी आयु के व्यक्ति को भी अलग परिवार बताते हैं। इस कारण नियमों का पेंच आड़े आने से परिवार गांव छोडऩे को सहमत नहीं होते और विस्थापन प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पाती।

Published on:
20 Mar 2018 06:00 am