कभी सिर्फ अन्न उगाने तक सीमित रहे जिले के किसान अब ‘ऊर्जा उत्पादक’ बनकर नई पहचान बना रहे हैं। टहला, रैणी, मालाखेड़ा, बड़ौदामेव, लक्ष्मणगढ़ और प्रतापगढ़ क्षेत्र के दस से ज्यादा किसानों ने हाल ही में अपने खेत में सोलर पैनल लगवाए हैं।
कभी सिर्फ अन्न उगाने तक सीमित रहे जिले के किसान अब ‘ऊर्जा उत्पादक’ बनकर नई पहचान बना रहे हैं। टहला, रैणी, मालाखेड़ा, बड़ौदामेव, लक्ष्मणगढ़ और प्रतापगढ़ क्षेत्र के दस से ज्यादा किसानों ने हाल ही में अपने खेत में सोलर पैनल लगवाए हैं। ये किसान सरकार को भी बिजली बेच रहे हैं। ऐसा करके ये किसान न केवल अपनी आय बढ़ा रहे हैं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण में भी अहम योगदान दे रहे हैं। जिले के अन्य क्षेत्रों में भी यह मॉडल तेजी से अपनाया जा रहा है। आधुनिक तकनीक के सहारे किसान आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रहे हैं और यह पहल अन्य किसानों के लिए भी प्रेरणा बन रही है।
मालाखेड़ा तहसील के हल्दीना गांव निवासी रिटायर्ड बीएसएफ जवान अमर सिंह खाकल ने अपनी 23 बीघा जमीन पर सोलर प्लांट स्थापित किया है। उन्होंने दो प्लांट लगाए हैं, जिनमें से एक शुरू हो चुका है और दूसरा जल्द चालू होगा। पहले इस जमीन पर पानी की समस्या के कारण खेती करने में मुश्किल होती थी, लेकिन अब यही जमीन आय का मजबूत स्रोत बन गई है। एक प्लांट से प्रतिदिन करीब 13 हजार यूनिट बिजली उत्पादन हो रहा है, जिसे बिजली निगम को सप्लाई किया जा रहा है। इस प्रोजेक्ट की कुल क्षमता लगभग 2.4 मेगावाट है और एक प्लांट पर करीब 7.5 करोड़ रुपए का निवेश किया हुआ है। खास बात यह है कि सोलर पैनल के नीचे अब जैविक खेती करने की भी योजना है, जिसमें गाजर, मूली और पालक जैसी सब्जियां उगाई जाएंगी।
बिजली बेचकर हर महीने लाखों की आय
टहला क्षेत्र के तालाब गांव के किसान शक्ति सिंह ने करीब 8 बीघा जमीन में सोलर प्लांट लगाया है। इससे उन्हें हर महीने औसतन करीब 4 लाख रुपए तक की आय हो रही है। गर्मियों में उत्पादन चरम पर रहता है। हालांकि, 33 केवी लाइन के शटडाउन के कारण दोपहर में सप्लाई बाधित होने से किसानों को नुकसान भी झेलना पड़ता है।
लीज पर जमीन लेकर भी बढ़ा रहे कदम
रामगढ़ के ऊंटवाल निवासी 33 वर्षीय इंदरपाल यादव ने 20 बीघा जमीन लीज पर लेकर दो सोलर प्लांट स्थापित किए हैं। प्रत्येक प्लांट पर करीब 8 करोड़ 20 लाख रुपए की लागत आई है और हर प्लांट से करीब 30 हजार यूनिट बिजली उत्पादन हो रहा है। यादव का कहना है कि भविष्य में पैनलों के नीचे खेती भी की जाएगी, लेकिन 33 केवी बिजली कटौती बड़ी समस्या बनी हुई है।
पर्यावरण संरक्षण में बड़ी भूमिका
सोलर ऊर्जा पूरी तरह प्रदूषण मुक्त है। इससे न केवल किसानों की आमदनी बढ़ रही है, बल्कि कार्बन उत्सर्जन में भी कमी आ रही है। पारंपरिक बिजली उत्पादन के मुकाबले यह मॉडल पर्यावरण के लिए अधिक लाभकारी साबित हो रहा है।
सोलर प्लांट के फायदे
-हर महीने तय अतिरिक्त आय, जिससे फसल पर निर्भरता कम होती है
-जहां खेती संभव नहीं, वहां सोलर प्लांट लगाकर जमीन को उपयोगी बना सकते हैं
-सोलर पैनलों के नीचे सब्जियां व अन्य फसलें उगाकर अतिरिक्त आय ली जा सकती है
-सोलर एनर्जी से पर्यावरण संरक्षण में मदद मिलती है, सरकार सब्सिडी व तकनीकी सहायता भी मुहैया कराती है