पादरी एंड्रयू ब्रनसन को रिहा कराने की कोशिश ट्रंप प्रशासन की सफल हो सकती है। अधिकारियों का लगता है कि पादरी को रिहा करा लिया जाएगा।
वाशिंगटनः अमरीकी अधिकारियों को लगता है कि वे तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तय्यप एर्दोगन के खिलाफ तख्तापलट की साजिश रचने के आरोप में जेल भेजे गए अमरीकी पादरी एंड्रयू ब्रनसन को रिहा कराने की उनकी कोशिश सफल होने वाली है। अमरीकी अधिकारी अपने तुर्की समकक्षों से किए उस समझौते के खत्म होने का इंतजार कर रहे हैं जो ब्रनसन के शुक्रवार को तुर्की की अदालत में पेश होने से पटरी पर है। अदालत अगर ब्रनसन पर से नजरबंदी हटाने का आदेश देती है और उनके यात्रा करने पर प्रतिबंध नहीं लगाती है तो वे देश छोड़ने के लिए आजाद हो जाएंगे। दोषी पाए जाने पर उन्हें 35 साल तक की कैद की सजा सुनाई जा सकती है।
उपराष्ट्रपति माइक पेंस ने भी जताई रिहाई की उम्मीद
अमरीका के उपराष्ट्रपति माइक पेंस ने भी ब्रनसन के रिहा होने की उम्मीद जताई है। उन्होंने कहा, "मैं यह सुनिश्चित करने वाला कोई नहीं हूं, मैं सिर्फ यह कह सकता हूं कि राष्ट्रपति ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक पादरी एंड्रयू ब्रनसन रिहा नहीं होते और अपने परिवार समेत अमरीका स्थित अपने घर नहीं लौटते, हम अपनी बात पर अड़े रहेंगे।" गुरुवार को अमरीकी विदेश विभाग प्रवक्ता हीदर नॉर्ट ने कहा, "मुझे ऐसे किसी समझौते की जानकारी नहीं है।
2016 से जेल में है अमरीकी पादरी
अमरीकी पादरी ब्रनसन 2016 से जेल में हैं और इसके बाद तुर्की और अमरीका के रिश्तों में खटास पैदा हो गई है। ट्रंप ने अगस्त में कहा था कि तुर्की ने दोस्त वाला काम नहीं किया है और उन्होंने पादरी पर जासूसी करने के अभियोग लगाए हैं जबकि वह जासूस नहीं हैं। बता दें कि तुर्की में 2016 में सैन्य तख्तापलट के असफल प्रयास के बाद देश में आपातकाल लगाया गया था, जिसके बाद इसे सात बार बढ़ा दिया गया। देश में सैन्य तख्तापलट के प्रयास में लगभग 250 लोगों की मौत हो गई थी जबकि 2,000 से अधिक लोग घायल हो गए थे। इसी साल 24 जून के राष्ट्रपति चुनाव में रेसेप तइप एर्दोगान की बड़ी जीत हासिल हुई थी। इसके बाद दो साल से लगा आपातकाल जुलाई में खत्म कर दिया गया था।