Health News: 30 वर्ष से अधिक उम्र के सभी लोगों की फैटी लीवर की जांच होगी।
Health News: यदि पुरुषों और महिलाओं में ये तीन लक्षण दिख जाएं तो उन्हें सावधान होने की जरूरत है। पुरुषों में कमर की माप 90 सेमी व महिलाओं की 80 सेमी से अधिक, बीएमआई 23 से ज्यादा और गर्दन के पीछे कालापन है उन मरीजों को स्वास्थ्य केंद्र में रेफर किया जाएगा। जिसमें नॉन अल्कोहलिक फैटी लीवर डिसीज की जांच के लिए एसजीओटी और एसजीपीटी सहित कई अन्य जांच होगी।
दरअसल, एक जून से मध्यप्रदेश के अशोकनगर जिले में स्वस्थ यकृत मिशन शुरू किया है। इसको लेकर एनसीडी नोडल अधिकारी डॉ. सीपी यादव ने बताया कि जिले में ग्रामीण स्तर पर आशा कार्यकर्ता 30 वर्ष से अधिक उम्र के सभी लोगों की सीबीएसी फॉर्म के माध्यम से और सभी स्वास्थ्य संस्थाओं पर सीएचओ व चिकित्सा अधिकारी जांच करेंगे। जिसमें कमर की माप व बीएमआई निर्धारित से ज्यादा और गर्दन के पीछे के भाग पर कालापन पाए जाने पर नॉन अल्कोहलिक फैटी लीवर डिसीज की जांच होगी।
प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर डॉक्टर ऐसे संभावित मरीजों की प्लेटलेट संख्या, एसजीओटी व एसजीपीटी की जांच करेंगे। जांच के माध्यम से एफआईबी - 4 स्कोर निकाला जाएगा, जो 1.3 से अधिक होने पर अल्ट्रासाउंड या फाइब्रो स्कैन जांच के लिए जिला अस्पताल या बड़े सेंटर रेफर किया जाएगा। जहां से संभावित मरीज को नॉन अल्कोहलिक फैटी लीवर डिजीज है या नहीं, इसका पता लग सकेगा।
अभी के समय में ऐसे केस आ रहे हैं कि जिन्होंने कभी अल्कोहल का सेवन नहीं किया है, फिर भी उन मरीजों में फैटी लीवर डिसीज है। ऐसे मरीजों को नॉन अल्कोहलिक फैटी लीवर डिसीज की श्रेणी में रखा जाता है । जिसका मुख्य कारण मोटापे का बढ़ना है।
लिवर को नुकसान पहुंचाने में वायरस ( हेपिटाइटिस वायरस), अल्कोहल एवं फैट (मोटापा ) का मुख्य योगदान रहता है । व्यस्त दिनचर्या और अनियमित खानपान के कारण है।
फैटी लीवर होने के कारण मेटाबॉलिज्म प्रभावित होता है। जिससे डायबिटीज, कैंसर और हार्ट अटैक का खतरा बहुत बढ़ जाता है । साइलेंट अटैक के केस बहुत अधिक संख्या में देखने में आ रहे हैं ।जिसका एक कारण फैटी लिवर हो सकता है।
कम से कम 150 मिनट हर हफ्ते फिजिकल एक्टिविटी करें (30 मिनट प्रतिदिन व सप्ताह में 5 दिन), नियमित खानपान, जल्दी सोना एवं सूर्योदय से पूर्व जागना जरुरी है। वजन को 10 प्रतिशत प्रति वर्ष कम करके फैटी लीवर को सामान्य लीवर कर सकते हैं।