- मुजफ्फराबाद से 160 किलोमीटर की दूरी- छोटे से गांव शारदी या सारदी में स्थित है मंदिर - आज भी पुरातन मंदिर के अवशेष मिलते हैंनई दिल्ली।
नई दिल्ली।करतारपुर कॉरिडोर के खुलने के बाद शारदा पीठ को खोलने की बात पाकिस्तानी मीडिया में चर्चा का विषय बना हुआ है। यह एक महत्वपूर्ण मंदिर है जो लाइन ऑफ कंट्रोल में आता है। केवल इतना ही नहीं मुख्यधारा की राजनीतिक पार्टियां जैसे कि पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) ने भी इसे लेकर अपनी आवाज उठाई है। पाक मीडिया में सुगबुगाहट है कि जल्द ही इमरान सरकार इसे खोलने की घोषणा कर सकती है। गौरतलब है कि यह एक प्राचीन शारदा मंदिर है। जिसे सारदा और सरादा भी कहा जाता है। नीलम घाटी में स्थित शारदा विश्वविद्यालय में आज भी पुरातन मंदिर के अवशेष मिलते हैं। यह स्थान मुजफ्फराबाद से 160 किलोमीटर की दूरी पर लाइन ऑफ कंट्रोल के छोटे से गांव शारदी या सारदी में स्थित है।
वर्तमान परमिट प्रणाली का उपयोग करने दिया जाए
द सेव शारदा कमेटी जो कश्मीरी पंडितों के तीर्थयात्रियों को शारदा मंदिर जाने की इजाजत देने के अभियान को चला रहा है, उसका कहना है कि उसके सदस्य दोनों तरफ के लोग हैं। उन्होंने केंद्र सरकार को एक याचिका भी दी है और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री को भी पत्र लिखा है। कश्मीरी पंडित शारदा को अपनी कुलदेवी के तौर पर उल्लिखित करते हैं। इसे लेकर मांग है कि उन्हें वर्तमान परमिट प्रणाली का उपयोग करने दिया जाए। वह मुजफ्फराबाद से होकर जाना चाहते हैं।' मंदिर के अलावा वहां भारत की सबसे पुरानी विश्वविद्यालय के अवशेष हैं। एक समय जब हिंदुत्व घट रहा था और बौद्ध धर्म बढ़ रहा था तब आदि शंकराचार्य ने विश्विद्यालय का दौरा किया और हिंदुत्व का पुन:जागरण शुरू हुआ।