
November-December 2026 Shadi Muhurat: इस विवाह सीजन की आखिरी शहनाई 11 जुलाई शुक्रवार को बजेगी। आज की रात शादियों की आखिरी धूमधाम होगी, जिसके बाद चातुर्मास (Chaturmas 2026) में मांगलिक कार्यों पर पूरी तरह ब्रेक लग जाएगा। केवल शादियों ही नहीं, बल्कि नए घरों में गृह प्रवेश, मुंडन और देव प्रतिष्ठा जैसे सभी शुभ कार्य भी नहीं होंगे। इस बीच केवल 22 जुलाई को भड़ली नवमी पर बिना पंचांग देखे अबूझ मुहूर्त में शादियां हो सकेंगी, जो केवल लोकाचार की परंपरा के तहत होगी।
चार महीनों में कई ऐसे बड़े ज्योतिषीय और धार्मिक कारण बन रहे हैं, जिनमें सनातन परंपरा के अनुसार विवाह पूरी तरह वर्जित माने जाते हैं।
गुरु तारा अस्त : 16 जुलाई (आषाढ़ शुक्ल द्वितीया गुरुवार) को गुरु तारा पश्चिम दिशा में अस्त हो जाएग, जो 09 अगस्त को पूर्व में उदय होगा। गुरु के अस्त होने से 3 दिन पहले (वृद्धत्वकाल) और उदय होने के 3 दिन बाद तक (बाल्यकाल) सभी शुभ कार्य वर्जित रहेंगे।
हरिशयन काल (देवशयन): 25 जुलाई (आषाढ़ शुक्ल एकादशी) से भगवान विष्णु चार महीने के लिए योगनिद्रा में चले जाएंगे, जो 20 नवंबर तक चलेगी। इस दौरान सिंध, पंजाब, कश्मीर और हिमाचल जैसे चुनिंदा राज्यों या विशेष संप्रदायों को छोड़कर देश भर में विवाह मुहूर्त नहीं होते।
श्राद्ध पक्ष : 26 सितंबर (भाद्रपद पूर्णिमा) से 10 अक्टूबर (आश्विन अमावस्या) तक महालय श्राद्ध पक्ष रहेगा। पितरों को समर्पित इन दिनों में मांगलिक कार्यों की पूर्ण मनाही होती है।
शुक्र तारा अस्त : 14 अक्टूबर को सुख-वैभव का प्रतीक शुक्र तारा पश्चिम में अस्त होगा और 28 अक्टूबर को पूर्व में उदय होगा। इस तारे के डूबने से 3 दिन पहले और उदय के 3 दिन बाद तक शादियों पर रोक रहेगी।
धनु मलमास (खरमास): 16 सितंबर से सूर्य के धनु राशि में प्रवेश करते ही पौष मलमास शुरू हो जाएगा, जो 14 जनवरी 2027 तक चलेगा। इस दौरान भी मांगलिक कार्यों पर पूरी तरह पाबंदी रहेगी।
ज्योतिषाचार्य डॉ. हिमांशु-हुकुमचंद जैन ने बताया कि पंचांग के अनुसार 11 जुलाई इस सीजन का आखिरी विवाह मुहूर्त है। इसके बाद देर्वो के सोने और सितारों के डूबने का सिलसिला शुरू हो रहा है। अब शहनाइयों की गूंज सीधे चार महीने बाद नवंबर के उत्तरार्ध में ही सुनाई देगी।
नवंबर- 21, 24, 25 और 26
दिसंबर- 02, 03, 11 और 12