अयोध्या में रामलला के मुख्य अर्चक ने पात्र लिखा कर जताई थी नाराजगी
अयोध्या : श्रीरामजन्मभूमि ( Shri Ram Janm Bhoomi ) के प्रधान पुजारी की नाराजगी के बाद रामलला ( Ramlala ) के रिसीवर कमिश्नर मनोज मिश्र ने रामलला के भोग राग व पुजारियों के पारिश्रमिक में बढ़ोतरी कर दी है. राम जन्म भूमि ( Ram Mandir ) के पुजारियों के पारिश्रमिक और भगवान के रागभोग में आने वाले खर्च की बढ़ोतरी को लेकर पिछले दिनों रामलला के पुजारी आचार्य सत्येंद्र दास ( Acharya Satendra Das ) ने राम जन्म भूमि के रिसीवर कमिश्नर अयोध्या को एक पत्र लिखकर नाराजगी व्यक्त की थी ,और असंतोष जाहिर करते हुए पुजारियों और कर्मचारियों के पारिश्रमिक और भगवान के राजभोग को खर्च को मानक के विपरीत बताया था . जिसको देखते हुए आज भगवान राम लला के राग भोग में मासिक ₹3800 की बढ़ोतरी करते हुए अब ₹30000 महीना भगवान राम लला के राजभोग के खर्च को स्वीकृति दी है ,साथ ही प्रधान पुजारी और सहायक पुजारियों और कर्मचारियों के वेतन को यथास्थिति रखा है . पिछले वर्ष 2018 में प्रधान पुजारी का वेतन ₹3520 तथा सहायक पुजारियों का 1710 रुपए इजाफा किया गया था जो इस वक्त बेहद ही कम मात्र ₹1000 प्रधान पुजारी और ₹500 सहायक पुजारी और कर्मचारियों के वेतन में बढ़ोतरी की गई थी . जिसको लेकर प्रधान पुजारी ने असंतोष व्यक्त किया थाअब भगवान राम लला के राग भोग में आने वाले खर्च पर ₹3800 महीने की बढ़ोतरी की गई है . लेकिन प्रधान पुजारी के वेतन में एक हज़ार और सहायक पुजारी और कर्मचारियों के वेतन में 500 रुपये की बढ़ोत्तरी की गई है .
अयोध्या में रामलला के मुख्य अर्चक ने पात्र लिखा कर जताई थी नाराजगी
बताते चलें पूर्व में यह खर्च मात्र ₹26200 था जिसमें ₹3800 की बढ़ोतरी करते हुए अब राम जन्म भूमि के रिसीवर कमिश्नर अयोध्या ने 30000 कर दिया है . लेकिन वर्ष 2018 में पुजारियों और कर्मचारियों की वेतन वृद्धि के आधार पर इस वर्ष की वृद्धि नहीं की गई है . 2018 में प्रधान पुजारी को 3520 रुपए की वेतन बढ़ोतरी हुई थी तो सहायक पुजारी और कर्मचारियों को 1710 रुपए का बढ़ोतरी की गई थी . लेकिन इस वर्ष मात्र ₹1000 प्रधान पुजारी और सहायक पुजारी और कर्मचारियों के वेतन में ₹500 की बढ़ोतरी की गई है. इस पूरे प्रकरण में श्रीरामजन्मभूमि ( Ram Janm Bhoomi ) के रिसीवर और अयोध्या के कमिश्नर का कहना है कि भगवान राम लला के राग भोग और सुरक्षा का विषय माननीय न्यायालय के अधीन है . वह परंपरागत ढंग से ही होता है उसको यथावत बनाने के लिए यदि थोड़ा बहुत अंतर होता है तो उसकी प्रतिपूर्ति कर दी जाती है .