जिले के किसान खरीफ फसल की तैयारी में जुट गए हैं। बेहतर उत्पादन के लिए कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को सलाह भी दी है। बीज बोनी से पूर्व खेत की अच्छे से तैयारी करें। बीजोपचार के बाद ही बीज की बोनी करें। 120-125 दिन की फसल लगाएं। बालाघाट. जिले के किसान खरीफ फसल की तैयारी […]
जिले के किसान खरीफ फसल की तैयारी में जुट गए हैं। बेहतर उत्पादन के लिए कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को सलाह भी दी है। बीज बोनी से पूर्व खेत की अच्छे से तैयारी करें। बीजोपचार के बाद ही बीज की बोनी करें। 120-125 दिन की फसल लगाएं।
बालाघाट. जिले के किसान खरीफ फसल की तैयारी में जुट गए हैं। बेहतर उत्पादन के लिए कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को सलाह भी दी है। बीज बोनी से पूर्व खेत की अच्छे से तैयारी करें। बीजोपचार के बाद ही बीज की बोनी करें। 120-125 दिन की फसल लगाएं। ताकि दूसरी फसल का भी उत्पादन लिया जा सकें। खेतों में रासायनिक खाद की अपेक्षा प्राकृतिक खाद का ही उपयोग करें।
जानकारी के अनुसार जिले में करीब 3 लाख हेक्टेयर कृषि भूमि पर खरीफ की फसल लगाई जाती है। जिसमें मुख्य रुप से धान की फसल है। इसके अलावा अरहर सहित अन्य फसलें भी लगाई जाती है। इधर, किसान खरीफ फसल की तैयारी में जुट गए हैं। अक्षय तृतीया के बाद से किसान बीज बोनी की शुरुआत करते हैं। हालांकि, जिन किसानों ने रबी की फसल लगाई है और जिनकी धान कटाई होना शेष है, वे देरी से खरीफ फसल के लिए बीज की बोनी करेंगे।
कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को सलाह दी है कि ग्रीष्म ऋतु में ही खेत की जुताई करना चाहिए। ताकि खेतों में मौजूद कीट, तीतली नष्ट हो जाते हैं। इसका फायदा किसानों को बाद में मिलता है। बाद में किसानों को कीटनाशक, खरपतवारनाशक दवाओं का उपयोग कम करना पड़ता है।
कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को सलाह दी है कि वे जैविक खेती को बढ़ावा दें। रासायनिक खादों का उपयोग करने से जहां भूमि की उर्वरा शक्ति खत्म होती है। वहीं जैविक खेती से उर्वरा शक्ति बनी रहती है। जिसके लिए आवश्यक है कि प्राकृतिक रुप से तैयार खाद जैसे जीवामृत, बीजामृत, घनजीवामृत, वर्मीकम्पोस्ट, गोबर गैस स्लरी का ही अधिक से अधिक उपयोग करें। आवश्यकता होने पर ही रासायनिक का सीमित मात्रा में उपयोग करें।
बीज बोनी से पूर्व किसानों को मिट्टी का परीक्षण कराना चाहिए। कृषि विभाग किसानों के खेतों की मिट्टी का निशुल्क परीक्षण करता है। मिट्टी परीक्षण से भूमि में कौन-कौन से तत्वों की कमी है, कौन-कौन से तत्वों की मात्रा अधिक है, के बारे में पता लगाया जा सकता है। इसके लिए कृषि विस्तार अधिकारियों से संपर्क कर उन्हें मिट्टी परीक्षण के लिए कहा जा सकता है।
धान का बेहतर उत्पादन लेने के लिए पहले बीजोपचार करें। बीजोपचार करने से धान का बेहतर उत्पादन लिया जा सकता है। अच्छा बीज होने से धान की पैदावार भी अच्छी होगी। कार्बेनाडाजिन के साथ मेनकोजेब 3 ग्राम प्रति किलोग्राम के साथ बीज को उपचारित किया जा सकता है। ट्राइकोडर्मा से भी बीज उपचारित कर सकते हैं। इसी तरह जैविक खेती के लिए भी बीजामृत से बीजोपचार किया जा सकता है। उपचारित बीज को कतार में बोने से नर्सरी अच्छी तैयार होती है।
किसानों को बीज की बोवाई करने के दौरान सावधानी बरतने की विशेष आवश्यकता है। बोनी के बाद इस चीज का विशेष ध्यान रखा जाए कि बीज ऊपर तो नहीं है। बीज ऊपर होने से उसे पक्षी चुग लेंगे, वह अंकुरित नहीं हो पाएगा। यदि अंकुरित होता है तो उसकी ग्रोथ अच्छी नहीं होगी।
खरीफ फसल के लिए बीज बोनी के बाद किसानों को उसकी सिंचाई करने की आवश्यकता होती है। ऐसे में किसानों को नर्सरी में नाली बनाकर सिंचाई करना चाहिए। इससे नर्सर जल्दी और अच्छी तैयार होती है। जबकि किसान जिस पारंपरिक अंदाज में सिंचाई करते हैं, उससे नर्सरी में बीज के खराब होने की संभावना अधिक होती है।
इनका कहना है
खरीफ फसल की तैयारी शुरु कर दी गई है। बीज बोने के लिए सभी आवश्यक तैयारियंा की जा रही है। खेतों को तैयार किया जा रहा है। बेहतर उत्पादन लेने के लिए कृषि विशेषज्ञों से समय-समय पर सलाह लेकर कार्य किया जाता है।
-सुनील सैय्याम, किसान
खरीफ फसल की तैयारियों के लिए किसानों को पहले खेत की अच्छे से तैयारी करना चाहिए। बीजोपचार करने के बाद ही बीज की बोनी करें। 120-125 दिन की फसल को ही लगाना चाहिए। निर्धारित समय पर कीटनाशक, खरपतवारनाशक दवाओं का उपयोग करें।
-डॉ. आरएल राउत, कृषि वैज्ञानिक, कृषि विज्ञान केंद्र बालाघाट
किसानों को जैविक खेती की ओर ज्यादा ध्यान देना चाहिए। बीजामृत से बीजोपचार कर लाइन से बोनी करें। बेहतर उत्पादन लेने के लिए प्राकृतिक रुप से तैयार खाद का ज्यादा उपयोग करें। रासायनिक खादों का बहुत ही कम मात्रा में आवश्यकता होने पर ही उपयोग करें।
-राजेश खोबरागड़े, उपसंचालक कृषि, बालाघाट