बालाघाट

इतिहास बनने को बेताब पुल की नपा नहीं ले रही सुध

वर्तमान में अनदेखी के चलते हो गया हैं जीर्ण-शीर्ण खतरे में अंग्रेजो के जमाने के छोटे पुलिया का अस्तित्व उपेक्षा से उखड़े पत्थर, पुल पर बने बड़े-बड़े गढ्डे वाहन तो दूर पैदल चलना भी हो गया हैं दूभर

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Dec 28, 2025
वर्तमान में अनदेखी के चलते हो गया हैं जीर्ण-शीर्ण

सतपुड़ा के घने जंगलों के बीच महाकौशल की गोद में बसे बालाघाट शहर में वैसे तो स्वयं से निर्मित अपना कुछ बताने को शेष नहीं है। लेकिन प्राकृतिक संसाधान और अंग्रेजों द्वारा बनाई गई कुछ धरोहरें ऐसी हैं, जो शहर को अपनी एक अलग पहचान करवाती है। इन्हीं में से एक शहर के समीपस्थ ग्राम गर्रा में मॉ वैनगंगा नदी के बीच अंग्रेजों द्वारा बनाया गया पुलिया है, जिसे शहरवासी छोटे पुल के नाम से पहचाना करते हैं।

वर्तमान में यह छोटा पुल उपेक्षा व अनदेखी का शिकार होकर अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहा था। अब तक इस दिशा में कोई सकारात्म प्रयास नहीं किए गए हैं। शहर के बुजुर्गजनों की माने तो यदि शीघ्र छोटे पुल का जीर्णोद्वार नहीं किया गया तो यह पुलिया पूरी तरह से विलुप्त होकर इतिहास के पन्नों में सिमटकर रह जाएगा। बालाघाट वासियों को इस नायाब धरोहर से भी हाथ धोना पड़ सकता है।

कई मायनों में अहम छोटा पुल

दिखने में साधारण लेकिन कई मायनों में अपना अलग महत्व रखने वाले छोटे पुल की खूबियां अनेक है। बताया जाता है कि बालाघाट जिले की स्थापना के समय से अंग्रेजों द्वारा यह पुल पत्थरों से बनाया गया है, जो शायद जिले में अब अकेला ही शेष रह गया है। पहले इसी पुल से आवागमन हुआ करता था। लेकिन 90 के दशक के बाद आबादी व नदी का जल स्तर पर बढऩे से बड़े पुल का निर्माण किया गया। इसके बाद से ही इसकी पूछ परख कम होने लगी। इसके बाद वैनगंगा नदी में बढ़े जलस्तर के विहंगम दृश्य को देखने इस पुल का उपयोग किया जाता है। वहीं कई धार्मिक व अत्येंष्टी अनुष्ठान भी पुल के माध्यम से ही संपन्न करवाए जाते हैं। गर्मी के दिनों में यहां मेला जैसा महौल रहता है। तैराकी व पिकनिक के शौकीन इसी पुल में डेला लगाते हैं।

जल संग्रहण में भी महत्वपूर्ण

अंग्रेजी शासनकाल में बनाए गए छोटा पुल पर ही पेयजल संग्रहण के लिए अनुमानित 1990 में स्टॉपडेम का निर्माण वैनगंगा नदी में किया गया था। जहां पर ही प्रतिवर्ष नगरपालिका नगर की जलापूर्ति के लिए ग्रीष्म ऋतु से पूर्व फरवरी में प्लेटें लगाकर पानी का संग्रहण करती है, लेकिन छोटा पुल, उपयोगी होने के बावजूद अनदेखी का शिकार होते चले गया। इसका ऊपरी हिस्सा बुरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गया है। इसे बनाने की आवश्यकता लंबे समय से महसूस की जा रही है। लेकिन अब तक इस ओर नगरपालिका ध्यान नहीं दे रही थी।

हर साल खर्च किए जा रहे लाखों

नपा प्रबंधन इस छोटे पुल पर इस बार भी 10 से 12 लाख की लागत से स्टॉपडेम बनाने की कार्ययोजना तैयार कर रही है। कार्ययोजना तैयार होते ही स्टॉपडेम का कार्य शुरू कर दिया जाएगा। लेकिन क्षतिग्रस्त हुए पुल के उपरी हिस्से की मरम्मत पर ध्यान नहीं दिया जाता है। गणमान्यों का कहना है कि स्टॉपडेम में पानी सहेजने के साथ ही छोटे पुल की सभी तरह की मरम्मत किया जाना चाहिए। तभी इस पुलिया का संरक्षण संभव हो पाएगा।

एक्सपर्ट व्यू-

शहर के पुरातत्व विद डॉ वीरेन्द्र सिंह गहरवार के अनुसार यदि छोटा पुल नहीं रहा तो नगरपालिका को वैनगंगा नदी में गर्मी के लिए पेयजल संग्रहण करने की समस्या पैदा हो जाएगी। यदि छोटा पुल को पूरा ही स्टॉपडेम के रूप में कवर कर दें तो नवीनकरण से न केवल पूरे वर्ष नदी में पानी रहेगा, अपितु जलसंकट का सामना भी नागरिकों को नहीं करना पड़ेगा। पुलिया का अस्तित्व भी बनाया व बचाया जा सकता है।
वर्सन
पुल पर डेम निर्माण के दौरान मरम्मतीकरण भी करवाया जाता है। पूरे पुल की मरम्मत के लिए कार्ययोजना बनाई जाएगी।
बीडी कतरोलिया, सीएमओ नपा बालाघाट

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