युवा मरीजों में दो गुना इजाफा ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाएं सर्वाधिक प्रभावित समय रहते पहचान और इसकी रोकथाम संभव
बेंगलूरु. पिछले कुछ वर्षों में 20 से 30 आयुवर्ग की महिलाओं में सर्वाइकल कैंसर के मामलों में दोगुना इजाफा हुआ है। 70 फीसदी मामले तीसरे चरण तक पहुंच चुके होते हैं।
लाखों महिलाएं मां बनने के सुख से वंंचित हो रही हैं, जबकि सर्वाइकल कैंसर की समय रहते पहचान और इसकी रोकथाम संभव है। पर जागरूकता की कमी है।
ऐसी महिलाओं तक पहुंचने के लिए किदवई मेमोरियल इंस्टीट्यूट ऑफ ऑन्कोलोजी (केएमआइओ) ने एक विशेष स्क्रीनिंग योजना बनाई है।
जिसके तहत 30 नवम्बर तक महिलाएं नि:शुल्क पैप स्मीयर और एचपीवी यानी ह्यूमन पेपिलोमा वायरस जांच करा सकेंगी। सर्वाइकल कैंसर की पहचान के लिए सार्वजनिक सूचना और शिक्षा सेवाएं शुरू करने की योजना है।
किदवई में 25 प्रतिशत मरीज
केएमआइओ के निदेशक डॉ. सी. रामचंद्र ने बताया कि केएमआइओ में हर साल सामने आने वाले महिलाओं के कैंसर में करीब 25 फीसदी यानी 1500 मामले सर्वाइकल कैंसर के होते हैं।
महिलाओं में यह दूसरा सबसे आम कैंसर के रूप में उभरा है। शहरों के मुकाबले ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाएं सर्वाधिक प्रभावित हैं। बेंगलूरु में हर साल करीब 850 नए मामले सामने आते हैं। अंतिम चरण में ज्यादातर मरीजों की पहचान के कारण उपचार में देरी हो जाती है।
21.1 प्रतिशत महिलाएं सिर्फ कर्नाटक से
पॉपुलेशन बेस्ड कैंसर रजिस्ट्री (पीबीसीआर) के अनुसार हर साल विश्व भर में सर्वाइकल कैंसर की नई मरीजों में से एक लाख भारत की होती हैं। इस एक लाख नए मामलों में से 21.1 प्रतिशत महिलाएं सिर्फ कर्नाटक से हैं।
विश्व स्वास्थ संगठन के मुताबिक भारत की महिलाओं में सर्वाइकल कैंसर के बढऩे की दर 2.5 प्रतिशत है, जबकि विश्व स्तर पर यह आंकड़ा 1.3 प्रतिशत है।
जाने सर्वाइकल कैंसर को
सर्वाइकल कैंसर महिलाओं के जननांग में होने वाला कैंसर है, यूटरस यानी गर्भाशय या बच्चेदानी के निचले हिस्से में सर्विक्स (ग्रीवा) होता है, जिसे बच्चेदानी के गर्दन के नाम से भी जाना जाता है। सर्विक्स जननांग के ऊपरी हिस्से तक फैला होता है, जिसमें होने वाले कैंसर को सर्वाइकल कैंसर कहते है।
कुछ तथ्य
* सर्वाइकल कैंसर का सबसे बड़ा कारण ह्यूमन पैपिलोमा वायरस। पेप स्मीयर जांच से आसानी से इसका पता चल जाता है।
* अज्ञानता और हिचकिचाहट के कारण महिलाएं अनजाने में ही इसकी चपेट में आ जाती हैं।
* विभिन्न माध्यमों से लोगों को इस बीमारी के प्रति जागरूक करने के बावजूद पढ़े-लिखे और आर्थिक रूप से सक्षम लोग महिलाएं भी इस जांच के लिए सामने नहीं आती हैं।
* आम लोग तो दूर अगर महिला चिकित्सक और नर्सों की बात करें तो इनमें से 2 प्रतिशत से भी कम ने पैप स्मीयर जांच कराई होती है।
* 18 वर्ष से 34 वर्ष आयु वाली महिलाओं को समय समय पर पैप स्मीयर जांच कराते रहना चाहिए। 35 से 50 वर्षीय महिलाओं को यह जांच हर साल करानी चाहिए। 50 वर्ष की आयु के ऊपर की महिलाओं को हर दो साल में इसे कराना चाहिए।
कारण
* एचपीवी संक्रमण, व्यक्तिगत स्वच्छता में लापरवाही, धूम्रपान।
* एक से ज्यादा व्यक्ति के साथ शारीरिक संबंध।
* कम उम्र में विवाह, अधिक बच्चे।
* गर्भ निरोधक गोलियों का अत्याधिक सेवन।
* परिवार में सर्वाइकल कैंसर का इतिहास।
(स्रोत : अमरीकन कैंसर सोसाइटी )
बचाव संभव, चिकित्सक से करें बात
सर्वाइकल कैंसर के मामले बढ़ रहे हैं। अस्पताल में आने वाली प्रति सौ मरीजों में से एक इस कैंसर का शिकार हैं।
अगर जननांग से निकलने वाला द्रव पीला, गुलाबी, भूरा हो, दुर्गंध आती हो, पेट के निचले हिस्से में दर्द होता हो, दो मासिक चक्रों के बीच रक्त का रिसाव होता हो, जननांग की सफाई के समय खून निकलता हो, जननांग से सफेद द्रव निकलता हो, सहवास के समय या बाद में खून निकलता हो, माहवारी के दौरान ज्यादा ब्लीडिंग हो तो तो आपको सावधान हो जाना चाहिए।
एचपीवी इंजेक्शन से इस बीमारी से बचाव भी संभव है। अपने चिकित्सक से बात करें।
प्रो. गीता शिवमूर्ति, प्रसूति और स्त्री रोग विशेषज्ञ, वाणी विलास सरकारी अस्पताल।