मानवीय शरीर एक ऐसा विचित्र कारखाना है, जिसमें...
मैसूरु. महावीर जिनालय में जैनाचार्य विजय रत्नसेन सूरीश्वर ने महामंगलकारी उपधान तप में कहा कि दुनिया के कारखाने अच्छे हैं, जिनमें कच्चा माल के रूप में हल्का माल डालते हैं और उनमें से अच्छा माल बाहर आता है, जबकि मानवीय शरीर एक ऐसा विचित्र कारखाना है, जिसमें अच्छे से अच्छा माल डालने पर भी बाहर आने वाला माल व्यर्थ हो जाता है।
शरीर की गंदगी के ऊपर चमड़ी का एक आवरण आया हुआ है, वह चमड़ी गोरी होने पर भी भीतर रही गंदगी को भूलना चाहिए। भव सागर को पार उतरने के लिए चारित्र धर्म की आराधना के लिए मात्र मनुष्य जीवन ही सर्वश्रेष्ठ है।
कलियुग में दुर्लभ हैं आराधना के भाव
बेंगलूरु. शांतिनगर जैन श्वेताम्बर मूर्ति पूजक संघ में आचार्य महेंद्र सागर सूरी ने प्रवचन में कहा कि वर्तमान में कलियुग चल रहा है, जिसमें असत तत्वों का और कमजोर भावों की ताकत अधिक हो रही है।
उन्होंने कहा कि यहां अनेक तरह की विषमताएं भी दिख रही हैं। आराधना के भाव दुर्लभ हो रहे हैं।
जिस कारण से सद्गति पानी भी कठिन है। इसके उपरांत सम्यक श्रद्धा का मानो अकाल हुआ जा रहा है। धर्माराधना में अल्पता है, उसमें भी प्रमाद आ गया है।