धर्मसभा: भगवान महावीर का धर्म दुख से सुख में नहीं, बुराइयों से अच्छाइयों में जाना है
व्यक्ति के जीवन में जितना भी सकारात्मक बदलाव आता है वही धर्म है तथा नकारात्मक बदलाव पाप है
बेंगलूरु. वर्र्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ, चिकपेट शाखा के तत्वावधान में गोड़वाड़ भवन में उपाध्याय रविंद्र मुनि के सान्निध्य में रमणीक मुनि ने कहा कि जिसकी जिंदगी जीने का तरीका, सोचने का तरीका बदल जाता है उसके जीवन में बदलाव सकारात्मक ही होगा। उन्होंने कहा कि धर्म और अधर्म में एक ही बात स्पष्ट है कि व्यक्ति के जीवन में जितना भी सकारात्मक बदलाव आता है वही धर्म है तथा नकारात्मक बदलाव पाप है।
भगवान महावीर की भाषा में सकारात्मक बदलाव को सम्यक्त्व तथा नकारात्मक परिवर्तन को मिथ्यात्व कहा गया है।
जो है नहीं उसे मान लेना ही नकारात्मकता है। जितने भी चातुर्मास आयोजन होते हैं उन सभी का एक ही उद्देश्य होता है सुनने और सुनाने वालों में सकारात्मक परिवर्तन आ जाए। सामायिक करना सकारात्मक बदलाव नहीं है वह बाहरी परिवर्तन है, लेकिन अंतर में समता भाव आएगा तभी आंतरिक परिवर्तन आएगा यह जरूरी है।
भगवान महावीर का धर्म दुख से सुख में नहीं बुराइयों से अच्छाइयों में जाना है। बुरा करने वाले का भगवान भी भला नहीं कर सकता है और भला करने वाले का भगवान बुरा नहीं होने देता है। इससे पूर्व उपाध्याय रविंद्र मुनि ने मंगलाचरण प्रदान किया। ऋषि मुनि ने गीतिका सुनाई। पारस मुनि ने मांगलिक प्रदान की। चिकपेट शाखा के महामंत्री गौतमचंद धारीवाल ने बताया कि चौमुखी जाप के लाभार्थी राजेन्द्र अजय विजय गादिया परिवार का जैन दुपट्टा ओढ़ाकर सम्मान किया।
सभा मे आध्यात्मिक चातुर्मास के मुख्य संयोजक रणजीतमल कानूंगा, राजेन्द्र कोठारी, आनंद फुलफगर, डूंगरमल बाफना, कंवरलाल तालेड़ा, हस्तीमल कोठारी सहित दिल्ली, घोडऩदी, पुणे व चणपटना सहित विभिन्न उपनगरीय संघों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे। निशांत बाफना ने 8 उपवास, आशा गुलेच्छा ने 7 सिद्धितप की तपस्या का पचकान लिया। उनको चिकपेट शाखा व महिला शाखा के पदाधिकारियों ने सम्मानित किया।