वे एक संपूर्ण युग परिवर्तन के पुरोधा है
बेंगलूरु. राजाजीनगर स्थानक में साध्वी संयमलता, साध्वी अमितप्रज्ञा, कमलप्रज्ञा, सौरभप्रज्ञा आदि ठाणा के सान्निध्य में उत्तराध्ययन सूत्र के 23वें अध्ययन की 36वीं गाथा का अनुष्ठान संपन्न हुआ।
सभा में साध्वी संयमलता ने कहा कि महावीर इतिहास पुरुष हैं। वे एक संपूर्ण युग परिवर्तन के पुरोधा है। वे शांति के विश्वदूत है, करुणा के दवेता है। उनका जीवन ही एक संदेश रहा।
दुनिया में जिनके जीवन में कुछ सीखा जा सकता है वे महावीर हैं। प्रारंभ में गुलाब पगारिया, समरथ कोठारी, पन्नालाल कोठारी, शांतिलाल चाणोदिया ने मंगल कलश की स्थापना की।
शांतिलाल पिचोलिया परिवार ने अनुष्ठान कराया। मंत्री ज्ञानचंद लोढ़ा ने बताया कि शुक्रवार को मां पद्मावती एकासन होगा।
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गुरु आज्ञा पालन कर जीवन सफल बनाएं
मैसूरु. महावीर जिनालय में जैनाचार्य विजय रत्नसेन सूरीश्वर ने उपधान तप में कहा कि 2500 से अधिक वर्ष के बड़े अंतराल के बाद भी आज भगवान महावीर द्वारा स्थापित चतुर्विध श्रीसंघ हमें प्राप्त हुआ है, जिसमें अनेक प्रभावक, आराधक, रक्षक और तपस्वी महापुरुषों ने अपने जीवन का योगदान दिया है।
उन्होंने कहा कि हर्ष विजय ने अपने जीवन में गुरु आज्ञा पालन द्वारा अपना जीवन सफल बनाया। वे मात्र 29 वर्ष की उम्र में भरे पूरे परिवर का त्याग करके पंन्यास प्रवर भंद्रकर विजय के प्रथम शिष्य के रूप में हर्ष विजय बनें।