मोक्ष, मार्ग और गति 3 शब्दों के इस अध्ययन में मोक्ष का तात्पर्य बताया।
बेंगलूरु. वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ चिकपेट शाखा के तत्वावधान में गोडवाड़ भवन में शुक्रवार को रमणीक मुनि ने उत्तराध्ययन सूत्र के समाचारी अध्ययन का वाचन करते हुए आचार्य गर्गाचार्य के प्रसंग पर कहा कि साथ हो तो शांति का होनी चाहिए, अशांति के कारक को सुधारना चाहिए।
अन्यथा वहां से दूर हो जाना चाहिए। मोक्ष, मार्ग और गति 3 शब्दों के इस अध्ययन में मोक्ष का तात्पर्य बताया।
यानी कषाय, क्रोध से छुटकारा पाना तथा अपने स्वभाव में उतर जाना, साथ ही घृणा का त्याग करके प्रेम में आना अहंकार को छोड़कर विनम्रता में आने को ही मुक्ति कहते हैं।
आत्मा के सुख का अनुभव करने को निर्वाण कहते हैं। मोक्ष के रास्ते पर चलना, यह साधारण अर्थ है।
जब हम मोक्ष मार्ग पर चलने की बात करते हैं तो अनेक प्रकार के कर्मकांड को देखते हैं। मोक्ष के मार्ग में ज्ञान, दर्शन, चरित्र और तप जरूरी है।
अपने स्वभाव में आना, लालच पर विजय पाना ही मुक्ति है। व्यक्ति की स्वयं की विशुद्धि ही उसकी मुक्ति है यानी व्यक्ति को अपने ही ज्ञान दर्शन चरित्र में आना चाहिए।
चिकपेट शाखा के सरंक्षक विजयराज लूणिया ने बताया कि सभा में मुमुक्षु सिमरन जैन का महामंत्री गौतमचंद धारीवाल परिवार तथा इन्द्रचंद बिलवाडिय़ा परिवार द्वारा मुनिवृन्दों की निश्रा में सम्मान हुआ।
आभार कार्याध्यक्ष प्रकाशचंद बम्ब ने जताया।