वोक्कालिगाओं के गढ़ में सिर्फ वोक्कालिगा उम्मीदवार होना या सामाजिक समस्याओं को उठाकर जनता की हमदर्दी प्राप्त करना ही पर्याप्त नहीं होगा
राजीव मिश्रा
बेंगलूरु. तेज रफ्तार नम्मा मेट्रो ने विजयनगर को बेंगलूरु के बाकी हिस्सों से जोड़ दिया है तो उसके सामानांतर चमचमाती कॉर्ड रोड आवास मंत्री एम. कृष्णप्पा के विधानसभा क्षेत्र की एक खूबसूरत तस्वीर पेश करती है। मुख्य सड़कों से गुजरते हुए अगर आप आरपीसी ले-आउट, हम्पीनगर या चंद्रा ले- आउट जाएं तो पेड़ों की घनी छांव में एक विकसित इलाके का दृश्य उपस्थित होता है।
मगर, हकीकत सिर्फ इतनी नहीं है। कचरे से भरी वृषभावती नदी घाटी लगभग चार दशक पुराने आवासीय क्षेत्र में एक नई तस्वीर पेश करती है, जो विजयनगर सम्राज्य के नाम पर रखे गए इस विधानसभा क्षेत्र से मेल नहीं खाती। इस नदी घाटी के किनारे बसे पादरायनपुर, गाळी आंजनेया मंदिर , दीपांजली नगर, केपी अग्रहारा में बाढ़, कचरा और कचरे से भरी नालियों ने लोगों का जीवन दूभर कर दिया है। विजयनगर विधानसभा क्षेत्र की इन्हीं दो अलग-अलग तस्वीरों में सामाजिक संघर्ष और राजनीतिक उठापटक की कहानी है।
दरअसल, वोक्कालिगाओं के गढ़ विजयनगर में चुनाव जीतने के लिए सिर्फ वोक्कालिगा उम्मीदवार होना या सामाजिक समस्याओं को उठाकर जनता की हमदर्दी प्राप्त करना ही पर्याप्त नहीं होगा। इस बार तीनों प्रमुख पार्टियों कांग्रेस, भाजपा और जनता दल (ध) ने वोक्कालिगा उम्मीदवार तो उतारे हैं मगर तीसरी पार्टी का उम्मीदवार मुकाबले को त्रिकोणीय बनाने में भी कामयाब होता नजर नहीं आ रहा। पिछली बार की तरह इस बार भी विजयनगर विधानसभा क्षेत्र में कांग्रेस और भाजपा के बीच सीधा मुकाबला है। एम.कृष्णप्पा को इस बार भाजपा के वरिष्ठ वार्ड पार्षद और वोक्कालिगा समुदाय के नेता एच. रवींद्र चुनौती दे रहे हैं।
कृष्णप्पा की हैट्रिक या रवींद्र की नई शुरुआत
आमने-सामने की इस कड़ी टक्कर में कृष्णप्पा जीत की हैट्रिक लगाएंगे या रवींद्र विधानसभा सफर की शुरुआत करेंगे इसको लेकर मतदाताओं के विचार बंटे हुए हैं। कुछ मतदाता विधानसभा क्षेत्र की बाहरी चमक-दमक से प्रभावित हैं तो समस्याओं का दंश झेलने वाले भी मुखर हैं। हम्पी नगर के प्रसाद साफ-साफ कहते हैं कि वे कांग्रेस प्रत्याशी का समर्थन करेंगे। क्यों? क्योंकि उन्हें सिर्फ अच्छी सड़कें चाहिए और सड़कें अच्छी हैं। लेकिन क्या वे सोचते हैं कि कृष्णप्पा की राह आसान है। प्रसाद कहते हैं नहीं।
इस बार कड़ी टक्कर है और कौन जीतेगा यह कहना मुश्किल। दूसरी तरफ, होसाहल्ली के हरीश गौड़ा कहते हैं कि अपनी कार के शीशे तक नहीं उतारने वाला इस बार हार का स्वाद चखेगा। हरीश का दावा है कि लोगों के सुख-दुख में हमेशा काम आने वाले रवींद्र को व्यापक जनसमर्थन मिल रहा है और इस बार बदलाव होकर रहेगा।पिछले विधानसभा चुनाव में कृष्णप्पा ने भाजपा उम्मीदवार वी.सोमण्णा को 32 हजार 6 42 मतों से पराजित किया था।
वी. सोमण्णा इस बार गोविंदराजनगर विधानसभा क्षेत्र से कृष्णप्पा के बेटे प्रिय कृष्णा को चुनौती दे रहे हैं जबकि पिछले बार प्रिय कृष्णा का चुनौती देने वाले भाजपा के एच रवींद्र इस बार कृष्णप्पा के खिलाफ मैदान में हैं। पिछले चुनाव में गोविंदराज नगर में रवींद्र को 30,194 मत मिले थे जबकि प्रिय कृष्ण को 72 हजार 654 मत मिले थे। इससे पहले वर्ष 2008 में कृष्णप्पा ने भाजपा उम्मीदवार प्रमिला नेसर्गी को लगभग 38 हजार मतों से पराजित किया था। लेकिन, इस बार हालात बदले हुए हैं। रवींद्र अपने कार्यकर्ताओं के साथ घर-घर जा रहे हैं और हर एक व्यक्ति से खुद मिलने की कोशिश कर रहे हैं। भाजपा अनुसूचित जाति मोर्चा की नेता गौरम्मा कहती हैं कि 'हमने पूरे विधानसभा क्षेत्र के हर दरवाजे पर एक-एक बार दस्तक दे दी है।
अब हम दोबारा उनके घरों तक पहुंच रहे हैं।Ó हालांकि, वोक्कालिगाओं के इस गढ़ में अन्य जातियों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। यहां लिंगायत 9 फीसदी, कुरुबा 15 फीसदी, मुस्लिम 12 फीसदी और अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) 25 फीसदी हैं। कृष्णप्पा समर्थक मानते हैं कि मुख्यमंत्री सिद्धरामय्या के चलते कुरुबा, अल्पसंख्यक और पिछड़ी जातियों का भी वोट उन्हें मिलेगा। लेकिन, कृष्णप्पा जाति मुद्दे से अलग यह मानते हैं कि हर समुदाय-हर वर्ग कांग्रेस को समर्थन देगा। लेकिन, दीपांजली नगर के योगेश की इस बात में भी दम है कि 'इस बार विधानसभा क्षेत्र में कृष्णप्पा विरोधी लहर है जिसका फायदा रवींद्र को मिलेगा।Ó
दरअसल, 2013 के विधानसभा चुनावों में शानदार जीत के बाद वार्ड चुनावों में कांग्रेस को करारी शिकस्त मिली। इस विधानसभा क्षेत्र के कुल 8 वार्ड में से छह वार्ड कांग्रेस हार गई। पांच वार्ड विजयनगर, होसाहल्ली, अतिगुप्पे, हम्पीनगर और दीपांजलीनगर में भाजपा ने जीत दर्ज की वहीं बापूजीनगर और गाळी आंजनेया मंदिर वार्ड कांग्रेस के खाते में है। एक वार्ड केपी अग्रहारा में निर्दलीय उम्मीदवार ने जीत दर्ज की थी। अब 2018 के विधानसभा चुनावों में अपनी-अपनी जीत का दावा करने वाले दोनों पक्षों में से किसमें कितना दम है यह 15 मई को ही स्पष्ट होगा।
जातीय समीकरण निर्णायक
रणनीतिक रूप से देखें तो विजयनगर विधानसभा क्षेत्र वोक्कालिगा राजनीति का गढ़ है। यहां वोक्कालिगाओं के मठ आदिचुनचुनगिरि का प्रशासनिक कार्यालय भी है। कृष्णप्पा समर्थक दावा करते हैं कि वोक्कालिगा पूरी तरह उनके साथ हैं। लगभग 3 लाख मतदाताओं वाले इस विधानसभा क्षेत्र में वोक्कालिगाओं की संख्या लगभग 25 फीसदी है। पिछले दो विधानसभा चुनावों में कृष्णप्पा की शानदार जीत से कार्यकर्ताओं का मनोबल काफी ऊंचा है।
सी. मदेशन दावा करते हैं कि कृष्णप्पा का हैट्रिक लगाना तीन सौ फीसदी तय है। उनका मानना है कि कृष्णप्पा सुबह 8 बजे से 11 बजे तक हर रोज विधानसभा क्षेत्र की जनता से मिलते हैं और उनकी शिक्षा और स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं को प्राथमिकता से हल करते हैं। अपराधियों का समर्थन नहीं करते। उन्होंने सड़कें बनवाई और पानी की समस्या सुलझाई। वहीं राजू नामक एक फल विक्रेता हर सवाल के जवाब में कांग्रेस प्रत्याशी का नाम भर लेता रहा।
हालांकि, इस बार भाजपा ने भी बड़ी चालाकी से वोक्कालिगा वोटों में सेंध लगाने के लिए एच. रवींद्र को मैदान में उतारा है। रवींद्र दावा करते हैं कि वोक्कालिगाओं का कांग्रेस के पक्ष में एकजुट होना इस बार संभव नहीं है। जब तक कृष्णप्पा का सामना गैर वोक्कालिगा उम्मीदवार से हुआ वे कृष्णप्पा के पक्ष में एकजुट हुए मगर इस बार वैसा नहीं होगा।