बैंगलोर

जो मुक्ति मार्ग में श्रम करता है वह श्रमण

सुबह होती है शाम होती है, जिंदगी यू ही तमाम हो जाती है।

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जो मुक्ति मार्ग में श्रम करता है वह श्रमण

बेंगलूरु. राजाजीनगर स्थानक में साध्वी संयमलता के सान्निध्य में साध्वी अमितप्रज्ञा ने उत्तराध्ययन सूत्र के 16वें अध्ययन की चर्चा करते हुए कहा कि सुबह होती है शाम होती है, जिंदगी यू ही तमाम हो जाती है।

हर पल यूं ही व्यर्थ चला जाता है। उन्होंने कहा कि अब्रह्मचर्य में सुख सुविधा, लाभ मानने वाला भूल जाता है कि अब्रह्मचर्य के सेवन से दुख दुविधा, अलाभ, पीड़ा दर्द रोग आदिफल ही मिलता है।

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साध्वी संयमलता ने उत्तराध्ययन सूत्र के माध्यम से श्रमणचर्या की चर्चा करते हुए कहा कि जो मुक्ति मार्ग में श्रम करता है वह श्रमण है।

इस अवसर पर प्रारंभ में साध्वी कमलप्रज्ञा ने उत्तराध्ययन सूत्र के मूल पाठ का वांचन किया।

भगवान पाशर््वनाथ मां पदमावती एकासन के आयोजन में 300 श्रावकों ने एकासन व्रत किया। साध्वी कमलप्रज्ञा ने एकासन व्रत की विधि करवाई।

इस अवसर पर दोपहर में पुष्पमाला के आकार में महिलाओं ने पुच्छिस्सुणं स्तोत्र का सामूहिक जाप किया।

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Published on:
03 Nov 2018 06:45 pm
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