
- जिला अस्पताल ने ली राहत की सांस
- पिछले पंद्रह दिनों में अलग-अलग ग्रामीण क्षेत्रों से आए बीमार बच्चों के लिए गए थे सैंपल
- जिला अस्पताल और चिकित्सा विभाग पूरी तरह तैयार
डूंगरपुर। पड़ोसी राज्य गुजरात में चांदीपुरा वायरस के लगातार मामले सामने आने के बाद सीमावर्ती डूंगरपुर जिले में भी स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह सतर्क हो गया है। गुजरात से लगे होने के कारण जिले के कई गांवों का वहां के शहरों से प्रतिदिन संपर्क बना रहता है। जिले की करीब 30 प्रतिशत आबादी रोजगार, व्यापार और अन्य कार्यों के लिए गुजरात पर निर्भर है। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग को संक्रमण फैलने की आशंका को देखते हुए लगातार निगरानी रखने के निर्देश दिए गए हैं। विशेष रूप से छोटे बच्चों में इस वायरस का खतरा अधिक होने के कारण जिला अस्पताल और चिकित्सा विभाग ने अतिरिक्त सतर्कता बरतनी शुरू कर दी है। पिछले पंद्रह दिनों के दौरान जिले के विभिन्न ग्रामीण क्षेत्रों से तेज बुखार, उल्टी, बेहोशी और दौरे जैसे लक्षणों वाले कई बच्चों को उपचार के लिए जिला अस्पताल लाया गया। इनमें से नौ बच्चों में चांदीपुरा वायरस जैसे प्रारंभिक लक्षण दिखाई देने पर चिकित्सकों ने बिना किसी जोखिम के उन्हें आइसोलेशन वार्ड में भर्ती किया और उनके सैंपल जांच के लिए पुणे स्थित राष्ट्रीय वायरोलॉजी प्रयोगशाला भेज दिए। जांच रिपोर्ट आने तक बच्चों की विशेष निगरानी की गई तथा आवश्यक उपचार जारी रखा गया। अब सभी नौ बच्चों की रिपोर्ट नेगेटिव आने के बाद जिला अस्पताल प्रशासन और चिकित्सकों ने राहत की सांस ली है।
हालांकि स्वास्थ्य विभाग किसी प्रकार की लापरवाही नहीं बरत रहा है। जिला अस्पताल में संदिग्ध मरीजों के लिए अलग वार्ड, पर्याप्त दवाइयों का भंडार, अतिरिक्त बेड, प्रशिक्षित चिकित्सक, नर्सिंग स्टाफ और आवश्यक चिकित्सा उपकरण उपलब्ध रखे गए हैं। वहीं चिकित्सा विभाग की फील्ड टीमें भी गांव-गांव जाकर बच्चों के स्वास्थ्य की निगरानी कर रही हैं। गुजरात सीमा से लगे गांवों में विशेष सर्वे कराया जा रहा है तथा आशा कार्यकर्ता और एएनएम संदिग्ध मरीजों की पहचान कर तत्काल सूचना दे रही हैं। चिकित्सा विभाग लोगों से भी अपील कर रहा है कि बच्चों में तेज बुखार, उल्टी, सिरदर्द, बेहोशी या दौरे जैसे लक्षण दिखाई देने पर घरेलू उपचार करने के बजाय तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र या जिला अस्पताल पहुंचें। साथ ही घरों के आसपास साफ-सफाई रखने, मच्छरों और सैंड फ्लाई से बचाव के उपाय अपनाने तथा बच्चों को सुरक्षित वातावरण में रखने की सलाह दी जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि वर्तमान में जिले में चांदीपुरा वायरस का कोई भी पॉजिटिव मामला सामने नहीं आया है, लेकिन एहतियात के तौर पर सभी आवश्यक तैयारियां पूरी कर ली गई हैं और स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है।
9 बच्चों के सैंपल की रिपोर्ट नेगेटिव
जिला अस्पताल में आसपुर पंचायत समिति, सागवाड़ा, गामड़ी अहाड़ा और बिछीवाड़ा पंचायत समिति के कुछ गांवों से चांदीपुरा वायरस जैसे लक्षण वाले बच्चे उपचार के लिए पहुंचे थे। अस्पताल प्रशासन ने तत्काल उपचार शुरू करने के साथ ही विशेष मॉनिटरिंग टीम का गठन किया। लोगों में भय और भ्रम की स्थिति पैदा न हो, इसलिए बच्चों के सैंपल लेकर उन्हें जांच के लिए पुणे स्थित वायरोलॉजी लैब भेजा गया। पहले चरण में छह बच्चों के सैंपल भेजे गए थे, जिनकी रिपोर्ट नेगेटिव आई। इसके बाद सात दिन पहले तीन और बच्चों के सैंपल भेजे गए, जिनकी रिपोर्ट भी शुक्रवार रात को नेगेटिव प्राप्त हुई। इसके बाद अस्पताल प्रशासन ने राहत की सांस ली।
क्या है चांदीपुरा वायरस
चांदीपुरा वायरस मुख्य रूप से सैंड फ्लाई के काटने से फैलता है। यह वायरस दिमागी बुखार (एन्सेफलाइटिस) का कारण बन सकता है और इसका प्रभाव विशेष रूप से छोटे बच्चों में देखा जाता है। प्रमुख लक्षण तेज बुखार, उल्टी, सिरदर्द, बेहोशी, दौरे पडऩा है। इस बीमारी का उपचार लक्षणों के आधार पर किया जाता है। बचाव के लिए घर के आसपास साफ-सफाई रखना, मच्छरों और सैंड फ्लाई से बचाव करना तथा मच्छरदानी का उपयोग करने की सलाह दी जाती है।
रतनपुरा गांव में एक बच्ची की हो चुकी है मौत
गुजरात के अहमदाबाद, मेहसाणा, खेड़ा, पंचमहल और साबरकांठा जिलों में चांदीपुरा वायरस के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। इनमें से अधिकांश जिले डूंगरपुर की सीमा से सटे हुए हैं। कुछ दिन पहले सीमलवाड़ा पंचायत समिति के रतनपुरा गांव की छह वर्षीय एक बच्ची में चांदीपुरा वायरस जैसे लक्षण पाए गए थे। गुजरात में उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई थी। इसके बाद से डूंगरपुर का चिकित्सा विभाग अलर्ट मोड पर कार्य कर रहा है। गुजरात से आने वाले बीमार बच्चों की विशेष निगरानी और सर्वे किया जा रहा है।
चिकित्सा विभाग भी तैयार
जिला मुख्यालय स्थित मेडिकल कॉलेज अस्पताल में सभी आवश्यक तैयारियों के साथ मेडिकल टीम तैनात है। शिशु एवं बाल रोग विभाग के प्रभारी डॉ. निलेश गोठी ने बताया कि अभी तक किसी भी मरीज की रिपोर्ट पॉजिटिव नहीं आई है। इसके बावजूद अतिरिक्त वार्ड, दवाइयां और स्टाफ की व्यवस्था की गई है। वहीं सीएमएचओ डॉ. अलकार गुप्ता ने बताया कि फील्ड में कार्यरत एएनएम और आशा कार्यकर्ता लगातार सर्वे एवं मॉनिटरिंग कर रही हैं। जिन क्षेत्रों में मच्छरों और सैंड फ्लाई का प्रकोप अधिक है, वहां फॉगिंग भी कराई जा रही है।
वर्जन
अभी तक डूंगरपुर जिले में चांदीपुरा वायरस का कोई भी मरीज पॉजिटिव नहीं मिला है। लक्षणों के आधार पर नौ बच्चों के सैंपल पुणे स्थित लैब भेजे गए थे, जिनकी सभी रिपोर्ट नेगेटिव आई हैं। जिला अस्पताल और चिकित्सा विभाग पूरी तरह तैयार हैं। लोगों को घबराने की आवश्यकता नहीं है।
— डॉ. महेंद्र डामोर, चिकित्सा अधीक्षक, डूंगरपुर