बांसवाड़ा

सरकारी स्कूलों में बदलेगा गणित और विज्ञान पढ़ाने का तरीका

Rajasthan

बच्चे खुद प्रयोग कर समझेंगे गणित और विज्ञान का जादू
कक्षा 6 से 10 के शिक्षकों को मिलेगा विशेष ''स्टेम'' प्रशिक्षण
बनकोड़ा
विद्यार्थियों को अक्सर गणित के लंबे-चौड़े फॉर्मूले और विज्ञान की कठिन परिभाषाएं पसीने छुड़ा देती हैं। पढ़ाने वाला शिक्षक यदि विशेष तैयारी के साथ बच्चों के लिए ये दोनों विषय रूचिकर बना दे तो स्वयं विद्यार्थी रटने की बजाय ''कर के सीखें'' से इनकी जिज्ञासा को शांत कर पाएंगे। अब राज्य के सरकारी स्कूलों में यह तस्वीर सामने आने वाली है। बच्चे अब केवल ब्लैकबोर्ड देखकर कॉपी नहीं भरेंगे, बल्कि खुद अपने हाथों से मॉडल बनाकर और प्रयोग करके विज्ञान व गणित के रहस्यों को समझेंगे।
राजस्थान स्कूल शिक्षा परिषद ने सत्र 2026-27 के लिए राज्य के कक्षा 6 से 10 तक पढ़ाने वाले विज्ञान और गणित शिक्षकों के लिए ''स्टेम'' (एसटीइएम यानि साइंस, टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग और मैथ्स) आधारित क्षमता संवर्धन प्रशिक्षण कार्यक्रम का पूरा खाका तैयार कर लिया है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 की सिफारिशों के तहत तैयार इस गाइडलाइन का सीधा मकसद बच्चों को किताबों के बोझ से निकालकर खोज और नवाचार की दुनिया से जोड़ना है।

इसलिए पड़ी जरूरत
अक्सर देखा जाता है कि छात्र परीक्षा पास करने के लिए विज्ञान के नियम और गणित के सूत्र रट लेते हैं, लेकिन व्यावहारिक जीवन में उनका उपयोग नहीं समझ पाते। परिषद के नए निर्देशों के अनुसार, इस प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य शिक्षकों की शिक्षण शैली को पूरी तरह बदलना है। अब शिक्षकों को ऐसी तकनीकें सिखाई जाएंगी जिससे वे बच्चों में 'क्यों' और 'कैसे' पूछने की जिज्ञासा जगा सकें। साथ ही गणित और विज्ञान को अलग-अलग पढ़ाने के बजाय एक-दूसरे से जोड़कर पढ़ाएं। किट और मॉडल्स के जरिए कठिन से कठिन टॉपिक को खेल-खेल में समझा सकें।

अब क्लासरूम में यह करेंगे बच्चे -
प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद स्कूलों में पढ़ाई का माहौल पूरी तरह बदलने वाला है। बच्चे अब केवल श्रोता नहीं रहेंगे, बल्कि क्लास के हर प्रयोग में उनकी सीधी भागीदारी होगी। बच्चे लैब या क्लास में रखी किट्स और वर्किंग मॉडल्स का खुद इस्तेमाल करेंगे। किताबों के सैद्धांतिक इकाईयों को छोटी-छोटी गतिविधियों और प्रोजेक्ट्स के जरिए व्यावहारिक रूप दिया जाएगा। शिक्षक सीधे जवाब देने के बजाय बच्चों को आपस में तर्क करने, विचार-मंथन करने और खुद सही उत्तर तक पहुंचने के लिए प्रेरित करेंगे।


राज्य से ब्लॉक स्तर तक होगा काम
इस बदलाव को जमीन पर उतारने के लिए शिक्षा विभाग ने तीन स्तरों पर काम शुरू कर दिया है। नीति निर्माण, मुख्य ट्रेनर्स (केआरपी) का चयन और बजट का आवंटन राज्य स्तर से पूरा किया जा रहा है। मुख्य जिला शिक्षा अधिकारी की देखरेख में शिक्षकों की सूची बनेगी और प्रशिक्षण शिविरों का अचानक निरीक्षण किया जाएगा ताकि गुणवत्ता बनी रहे। ब्लॉक स्तर पर मुख्य ब्लॉक शिक्षा अधिकारी के नेतृत्व में शिक्षकों के प्रयोगात्मक शिविर लगेंगे, जहां शिक्षक खुद भी इन किट्स पर प्रैक्टिस करेंगे और नई पाठ-योजनाएं तैयार करेंगे।

Updated on:
15 Aug 2026 06:00 am
Published on:
15 Aug 2026 06:00 am