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बांसवाड़ा : शहर की नाबालिग छात्रा का अश्लील वीडियो खाड़ी देशों तक वायरल, पुलिस ने खानापूर्ति कर दबाया मामला!

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Updated: 23 Dec 2018, 12:46 PM IST
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बांसवाड़ा : शहर की नाबालिग छात्रा का अश्लील वीडियो खाड़ी देशों तक वायरल, पुलिस ने खानापूर्ति कर दबाया मामला!

चेतन द्विवेदी. बांसवाड़ा. शहर की एक नाबालिग छात्रा के अश्लील एवं आपत्तिजनक वीडियो वायरल करने का गंभीर मामला सामने आया है। इसमें पुलिस ने पुख्ता कार्रवाई के बजाय खानापूर्ति कर पूरे प्रकरण को दबा दिया है। जबकि चार किशोरों को कोतवाली भी लाया गया था। मामले में पुख्ता कार्रवाई नहीं होने से पुलिस की कार्यशैली पर प्रश्न चिन्ह लग रहे हैं। सूत्रों के अनुसार शहर की एक कॉलोनी की छात्रा के अश्लील एवं आपत्तिजनक वीडियो एक किशोर के मोबाइल में थे। पिछले दिनों इन वीडियो को उसके दोस्त ने फिंगर प्रिंट व वाई-फाई की मदद से स्वयं के मोबाइल में ले लिए और बाद में वायरल कर दिए। इसके बाद यह वीडियो शहर ही नहीं, वाट्सएप ग्रुप के माध्यम से खाड़ी देशों में कार्यरत लोगों तक भी पहुंच गए।

आरोपियों को सिर्फ समझाया
मामले में कोतवाली थाना प्रभारी दिलीपदान ने बताया कि गत दिनों एक व्यक्ति ने अपनी नाबालिग पुत्री के अश्लील वीडियो वायरल होने की इत्त्तला दी। आरोपियों के बारे में जानकारी देते हुए उनके मोबाइल से वीडियो डीलिट कराने और वीडियो वायरल करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की गुहार लगाई। सीआई ने बताया कि शिकायत के बाद प्रकरण की जांच हैड कांस्टेबल मदन सिंह को सौंपी गई, जिन्होंने पड़ताल कर वीडियो वायरल करने वालों को थाने पर बुलाया और काफी देर पूछताछ की। बाद में आरोपियों को भविष्य में इस प्रकार की पुनरावृत्ति नहीं करने का कहकर छोड़ दिया।

पुलिस की भूमिका पर संदेह
शहर में ऑनलाइन देह व्यापार के फैल रहे नेटवर्क के बीच नाबालिग के अश्लील वीडियो के वायरल होने और पुख्ता कार्रवाई नहीं करने से पुलिस की भूमिका पर संदेह पैदा हो रहा है। साथ ही मामले में जांच अधिकारी की भूमिका भी सवाल उठ रहे हैं। सूत्रों के अनुसार थाने में पूछताछ के लिए लाए गए किशोरों ने पुलिस के सामने वीडियो वायरल करना स्वीकार किया, इसके बाद भी पुलिस ने उनके खिलाफ कार्रवाई नहीं की। इससे मामले में संदेह गहराता जा रहा है।

नहीं बरती गंभीरता
मामले में पुलिस की लापरवाही सामने आई। नाबालिग के पिता की शिकायत मिलने के बाद रिपोर्ट दर्ज करने की बजाय पुलिस ने प्रकरण को परिवाद मानकर जांच में रखा। गंभीर अपराध होने के बाद भी गंभीरता नहीं बरती और आरोपियों से समझाइश कर इतिश्री कर ली।

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