
सागवाड़ा @ पत्रिका. कान्हडदास धाम बड़ा रामद्वारा में हुए सत्संग में शाहपुरा धाम के रामस्नेही संत कीर्तिराम ने कहा कि समय ईश्वर की अमूल्य देन है। उन्होंने बताया कि धन खोकर पुन: प्राप्त किया जा सकता है, ज्ञान अभ्यास से फिर अर्जित हो सकता है, शक्ति प्रयत्न से लौट सकती है, परंतु समय का एक क्षण भी बीत जाने के बाद कभी लौटकर नहीं आता। संत कीर्तिराम ने कहा कि सूर्य के प्रतिदिन उदय और अस्त होने के साथ जीवन क्षीण होता जाता है, पर मनुष्य काल की गति को पहचान नहीं पाता। काल ही सृष्टि करता है और काल ही संहार करता है। काल अत्यंत बलवान है और इसका अतिक्रमण किसी के लिए संभव नहीं। इसलिए विवेकी पुरुष समय को केवल व्यतीत नहीं करता, वह उसे साधना, सेवा, सद्कर्म और आत्मोन्नति में पवित्र करता है। उन्होंने आह्वान किया कि समय को पहचानिए, उसका सम्मान कीजिए और उसे शुभ, पवित्र, सार्थक तथा दिव्य कार्यों में समर्पित कीजिए। संत ने कहा कि जब समय सत्य को अर्पित होता है, तब जीवन साधना बन जाता है। जब कर्म पूजा बन जाता है, तब अंत:करण निर्मल हो जाता है और आत्मज्ञान का प्रकाश उदित होता है। सत्संग में ‘तोरा मन दर्पण कहलाए’ भक्ति गीत प्रस्तुत किया गया। संत प्रसाद सुरेश ठाकुर परिवार की ओर से रहा। इस दौरान देवीलाल मोची, नटवरलाल सुथार, विष्णु भावसार, हीरा प्रजापत, भुरा प्रजापत, रंजना मोची, प्रेमलता पंचाल, मीनाक्षी पंचाल, संगीता सोनी, गुलाब भावसार, प्रेमलता सुथार, करुणा भट्ट सहित कई श्रद्धालु उपस्थित रहे।