जिले में जनवरी माह में चार मरीज चिन्हित हो चुके हैं। पिछले वर्ष जिले में इस बीमारी के करीब 107 मरीज मिले थे।
नए वर्ष के पहले माह से हुई मरीज मिलने की शुरूआत
बारां. जिले में नए साल की शुरूआत के साथ ही स्क्रब टायफस के मरीज सामने आने का सिलसिला शुरू हो गया। पिछले वर्ष भी हर माह स्क्रब टायफस के मरीज चिन्हित होते रहे है। हालांकि लक्षण के आधार पर तत्काल उपचार लेने से मरीज जल्द स्वस्थ हो जाते हैं, लेकिन लापरवाही बरतने से स्वास्थ्य जटिलता शुरू हो जाती है। जिले में जनवरी माह में चार मरीज चिन्हित हो चुके हैं। पिछले वर्ष जिले में इस बीमारी के करीब 107 मरीज मिले थे। स्क्रब टायफस के अलावा मलेरिया ने भी जिले में नए वर्ष में दस्तक दी है।
जिले में यों तो अरसे से मलेरिया के पॉजीटिव मरीज नहीं आ रहे हैं। पिछले पूरे बारह माह में मलेरिया का एक मात्र मरीज मिला था। इससे चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी भी मलेरिया को लेकर काफी राहत में रहे है, लेकिन इस वर्ष साल के शुरूआती माह जनवरी में ही मलेरिया ने दस्तक देकर चौंका दिया। हालांकि अब तक एक मात्र मरीज मिला है, लेकिन जागरूक रहने की आवश्यकता है। स्वास्थ्य विभाग की ओर से मलेरिया और डेंगू पर नियंत्रण रखने के लिए एंटी लार्वा गतिविधियों पर फोकस करना होगा।
स्क्रबटायफस चिगर्स माइट (पिस्सू, जूं) के काटने से होता है। ये घास या झाडिय़ों वाले क्षेत्रों में रहते हैं। वहां से पशुओं के शरीर और उनके सम्पर्क में आने से पशुपालक स्क्रब टायफस से संक्रमित हो जाते हैं। मरीज मिलते ही टीम भेजी जाती है। प्रभावित स्थल पर साइपरमेथ्रिन का छिडकाव कराया जाता है।
डॉ. सतीश लहरिया, डीडी, पशुपालन
जब पशु झाडिय़ों से रगड़ते हुए निकलते है तो पिस्सू उनके शरीर पर सवार हो जाता है। इससे वो पशु पालक, बाद में लोगों तक फैलता है। जिले में स्क्रब टाइफस के 4 मरीज मिले हैं। चारों कोटा में इलाज के बाद स्वस्थ हैं।
डॉ. संजीव सक्सेना, सीएमएचओ