होली से एक दिन पहले निकलने वाली ऐतिहासिक रामबरात इस बार प्रशासन के लिए बड़ी परीक्षा बन गई है। दो और तीन मार्च को शहर के कई संवेदनशील इलाकों से गुजरने वाली शोभायात्रा को शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने के लिए पुलिस-प्रशासन ने जमीन पर तैयारी तेज कर दी है।
बरेली। होली से एक दिन पहले निकलने वाली ऐतिहासिक रामबरात इस बार प्रशासन के लिए बड़ी परीक्षा बन गई है। दो और तीन मार्च को शहर के कई संवेदनशील इलाकों से गुजरने वाली शोभायात्रा को शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने के लिए पुलिस-प्रशासन ने जमीन पर तैयारी तेज कर दी है। अफसरों ने खुद सड़कों पर उतरकर हालात परखी और संभावित बाधाओं को चिह्नित किया।
रविवार को एसपी सिटी मानुष पारीक ने सीओ प्रथम शिवम आशुतोष और सीओ द्वितीय अंजनी कुमार तिवारी के साथ कोतवाली, किला और प्रेमनगर थाना प्रभारियों के साथ शोभायात्रा मार्ग का निरीक्षण किया। अफसरों ने बिहारीपुर से कुतुबखाना, बड़ा बाजार होते हुए आलमगीरिगंज समेत अन्य क्षेत्र में पैदल भ्रमण कर सड़कों, नालियों और बिजली के तारों की स्थिति देखी।
एसपी सिटी ने बताया कि शहर क्षेत्र में कुल 867 स्थानों पर होली जुलूस और होलिका दहन होगा। इनमें ए प्लस श्रेणी के संवेदनशील स्थलों पर विशेष नजर रखी जा रही है। जहां पहले से सीसीटीवी कैमरे मौजूद नहीं हैं, वहां स्थानीय सहयोग से कैमरे लगाए जा रहे हैं। विवादित स्थानों पर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात रहेगा और हर गतिविधि पर कड़ी निगरानी रखी जाएगी।
एसएसपी अनुराग आर्य के निर्देश पर इस बार जिले में उपलब्ध पूरे पुलिस बल को ड्यूटी पर लगाया गया है। दफ्तरों और पेशी में तैनात कर्मचारी भी फील्ड में तैनात रहेंगे। पहले से मौजूद दो कंपनियों के अलावा दो और पीएसी कंपनियां मंगाई गई हैं, साथ ही एक कंपनी आरएएफ भी तैनात की गई है। प्रशासन का दावा है कि किसी भी स्थिति से निपटने के लिए पर्याप्त बल और संसाधन उपलब्ध रहेंगे।
बरेली की 166 वर्ष पुरानी रामबरात और 74 वर्ष पुरानी नृसिंह शोभायात्रा इस बार अलग-अलग तिथियों पर निकलेंगी। चंद्र ग्रहण के कारण तिथियों में बदलाव हुआ है। रामलीला सभा के प्रवक्ता विशाल मेहरोत्रा के अनुसार ग्रहण के सूतक काल में भगवान के स्वरूप को रथ पर नहीं बैठाया जा सकता, इसलिए रामबरात पहले दिन निकलेगी। वहीं नृसिंह शोभायात्रा समिति के अध्यक्ष पंडित विजय शर्मा ने कहा कि उनकी यात्रा होली के दिन ही निकलेगी और भव्यता में कोई कमी नहीं आएगी।
हर साल बमनपुरी से निकलने वाली रामबरात और चाहबाई से निकलने वाली नृसिंह शोभायात्रा कुतुबखाना पर मिलती थीं, जिससे उत्सव और भव्य हो जाता था। अलग-अलग तिथियों में आयोजन होने से इस बार वह पारंपरिक संगम नहीं हो पाएगा और भीड़ भी अपेक्षाकृत कम रहने की संभावना है। फिलहाल प्रशासन की नजर हर मोड़ पर है और कोशिश है कि शहर की आस्था और रंगों का उत्सव शांति व सौहार्द के साथ संपन्न हो।