बरेली

तिरंगे में लिपटकर लौटा लाल… बहेड़ी के हवलदार मनदीप सिंह को नम आंखों से अंतिम विदाई, बेटे ने दी मुखाग्नि

देश की सरहद पर ड्यूटी निभाते-निभाते जिंदगी की जंग हार गए बहेड़ी के हवलदार मनदीप सिंह का पार्थिव शरीर सोमवार दोपहर उनके पैतृक गांव गौरीखेड़ा गौटिया पहुंचा तो पूरा गांव गम में डूब गया। बरेली जाट रेजिमेंट के जवानों ने पूरे सैन्य सम्मान के साथ गार्ड ऑफ ऑनर दिया और हर आंख नम हो गई।

2 min read
Apr 27, 2026

बरेली। देश की सरहद पर ड्यूटी निभाते-निभाते जिंदगी की जंग हार गए बहेड़ी के हवलदार मनदीप सिंह का पार्थिव शरीर सोमवार दोपहर उनके पैतृक गांव गौरीखेड़ा गौटिया पहुंचा तो पूरा गांव गम में डूब गया। बरेली जाट रेजिमेंट के जवानों ने पूरे सैन्य सम्मान के साथ गार्ड ऑफ ऑनर दिया और हर आंख नम हो गई।

39 वर्षीय हवलदार मनदीप सिंह पंजाब के बठिंडा में तैनात थे। दो दिन पहले अचानक उनकी तबीयत बिगड़ी, जिसके बाद उन्हें आर्मी अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक उनकी मौत हार्ट अटैक से हुई। जैसे ही तिरंगे में लिपटा पार्थिव शरीर गांव पहुंचा, आसपास के इलाकों से लोग उमड़ पड़े। सैन्य अफसरों और जवानों के साथ ताबूत गांव लाया गया। अंतिम दर्शन के दौरान परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल था। जाट रेजिमेंट ने सलामी देकर अपने साथी को अंतिम विदाई दी।

मां ने चूमा माथा, बेटे ने दी अंतिम विदाई

सबसे भावुक पल तब आया जब मां रंजीत कौर ने अपने बेटे का माथा चूमकर अंतिम विदाई दी। बड़े भाई जगदीप सिंह ने पुष्प अर्पित किए। इसके बाद बेटे अगमप्रीत (8) ने पिता की चिता को मुखाग्नि दी। इस दौरान पूरा माहौल गमगीन हो गया। 12 वर्षीय बेटी गुरलीन कौर हाथ में पिता की तस्वीर लिए गुमसुम खड़ी रही, जबकि छोटा बेटा अगमप्रीत आंसुओं के बीच ताबूत को देखता रहा। बताया गया कि मनदीप कुछ महीनों बाद छुट्टी पर घर आने वाले थे, लेकिन उससे पहले ही मौत की खबर ने पूरे परिवार को तोड़ दिया।

अधिकारियों की गैरमौजूदगी पर उठे सवाल

गांव में अंतिम संस्कार के दौरान राजस्व विभाग से केवल लेखपाल मनीष कुमार सिंह ही मौजूद दिखे। तहसीलदार सहित अन्य अधिकारी नदारद रहे, जिसको लेकर ग्रामीणों और परिजनों में नाराजगी देखने को मिली। वहीं पुलिस विभाग से इंस्पेक्टर दिनेश कुमार शर्मा अपनी टीम के साथ मुस्तैद रहे। पूरे सैन्य सम्मान के साथ हवलदार मनदीप सिंह का अंतिम संस्कार उनके खेत में किया गया। गगनदीप कौर, बेटे-बेटी और परिजनों को सेना की ओर से तिरंगा सौंपा गया। गांव ने अपने वीर सपूत को नम आंखों से अंतिम विदाई दी।

Also Read
View All