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पचपदरा/बाड़मेर. शिव से भाजपा विधायक और पूर्व विदेश मंत्री जसवंतसिंह के पुत्र मानवेन्द्रसिंह ने शनिवार को भाजपा तो छोड़ दी लेकिन कांग्रेस में भी नहीं गए। उन्होंने यह निर्णय बड़ी सभा के बाद यह कहकर टाल दिया कि यह जनता तय करेगी। एेसे में असमंजस बरकरार रहा। रेगिस्तान में यह सभा राजनीतिक तूफान की तरह रही जिसको लेकर जयपुर-दिल्ली तक बेचैनी थी।
मानवेन्द्र ने कहा कि चार साल तक सरकार ने हमारे लोगों को प्रताडि़त किया। उनके तबादले किए। झूठे मामले दर्ज किए गए। चतुरसिंह व आनंदपाल प्रकरण में सुनवाई नहीं हुई। जो भी हमसे जुड़े थे उनको परेशान किया गया। कोई सुनने वाला नहीं था। इधर मेरे पिता बीमार थे और परिवार की परिस्थितियां अलग थीं। ऐसे में चार साल तक कुछ नहीं बोल पाया। लोग कहते रहे कि बोलते क्यों नहीं हो। आज चुप्पी तोड़ रहा हूं, बहुत कुछ सहा है। जब कहीं सुनवाई नहीं हो तो धैर्य जवाब दे जाता है और अब मेरा धैर्य समाप्त हो गया है। खुलकर बोलने का वक्त आ गया है।
मानवेन्द्रसिंह की पत्नी चित्रासिंह ने कहा कि आज यह निर्णय कर लेना है कि प्रदेश की वसुंधरा सरकार को उखाड़ फेंकेंगे। अभिमान का जवाब स्वाभिमान से दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि जसवंतसिंह को टिकट नहीं मिलने पर परिवार की मदद यहां के लोगों ने की है। हमारा फर्ज है कि इनके साथ खडे़ रहें। सरकार ने काले झण्डे दिखाने पर लोगों के खिलाफ मामले दर्ज कर दिए। लोकतांत्रिक अधिकार छीना जा रहा है। सांसद पर हमले का प्रकरण बनाकर लोगों को फंसाया गया। इस तरह अभिमान में हुई कार्रवाई पर हम चुप नहीं रह सकते। स्वाभिमान के लिए लोगों के बीच में रहकर उनकी मदद करेंगे।
स्वरूपसिंह राठौड़ ने कहा कि जहर के घूंट पीकर भी हमने स्वाभिमान नहीं छोड़ा। अब वक्त आ गया है कि अभिमान और अपमान का जवाब दिया जाए। मारवाड़ राजपूत सभा अध्यक्ष हनुमानसिंह खांगटा ने कहा कि युवा जोश को कायम रखें। ये अन्याय, अपमान जसोल परिवार का नहीं, पूरे राजस्थान का हुआ। भाजपा रूपी पौधे को जिन्होंने बड़ा किया, आज उस पौधे के फल दूसरे खा रहे हैं। गिरिराजसिंह लोटवाड़ा ने कहा कि जसवंतसिंह का टिकट षड्यंत्रपूर्वक काटा गया। सरकार ने कई निर्दोष लोगों की हत्याएं करवाई। इसे उखाड़कर फेंकना है। डांगावास, सांवराद की पीड़ा है, उसको भूले नहीं है।
प्रवीणसिंह आगोर, जोगेन्द्रसिंह राजपुरोहित,आसुसिंह, जनेन्द्रसिंह, मौलवी अब्दुल करीम, तेजदान देथा, आजादसिंह बाड़मेर, गणपतसिंह ताणू, रामसिंह राजपुरोहित बोथिया, रणजीत चौधरी, नवल किशोर लीलावत, रतन सिंह बाखासर, दुर्गसिंह खींवसर, श्रवणसिंह दासपां,रायपुर की पूर्व प्रधान कमला रावत, सुनिता भाटी, बलराम प्रजापत, सेवानिवृत्त आयकर अधिकारी राजेन्द्रसिंह राजपुरोहित, दलपतसिंह पूनमनगर, वीर बहादुरसिंह, अमरु बिश्नोई समेत कई जनों ने संबोधित किया।चर्चाओं में ही रहे, आए नहीं- पचपदरा में शनिवार को आयोजित स्वाभिमान सभा में भाजपा के बागी नेता यशवंत सिन्हा, अरूण शौरी, शत्रुध्न सिन्हा के भाग लेने की चर्चा ही रही, कोई नेता नहीं पहुंचा। कांग्रेस से जितेन्द्रसिंह भी नहीं आए।
कहां-कहां से आए
स्वाभिमान रैली में बाड़मेर-जैसलमेर के लोगों की तादाद एक-तिहाई थी। इन दोनों जिलों के अलावा जोधपुर, जालोर, पाली, सिरोही, नागौर, बीकानेर, सीकर, जयपुर सहित प्रदेश के कई जिलों से भी लोग आए।