जिले के मियों का बाड़ा गांव का नाम महेशनगर कर दिया गया है। ग्राम पंचायत की ओर से 2010 मंे पारित प्रस्ताव के बाद राज्य सरकार के मार्फत केन्द्रीय गृह मंत्रालय तक प्रस्ताव पहुंचा और नाम बदला गया। नाम बदलने की वजह प्राचीन नाम महेश रो बाड़ो बताया गया।
गांव के प्रस्ताव पर मियों का बाड़ा हुआ महेश नगर
समदड़ी (बाड़मेर)
जिले के मियों का बाड़ा गांव का नाम महेशनगर कर दिया गया है। ग्राम पंचायत की ओर से 2010 मंे पारित प्रस्ताव के बाद राज्य सरकार के मार्फत केन्द्रीय गृह मंत्रालय तक प्रस्ताव पहुंचा और नाम बदला गया। नाम बदलने की वजह प्राचीन नाम महेश रो बाड़ो बताया गया। गांव के लोग ये भी कहते हैं कि अल्पसंख्यक बाहुल्य नहीं होते हुए भी मियों का बाड़ा नाम होने से ग्रामीणों को शादी व अन्य सामाजिक आयोजनों में कई सवाल-जवाब का सामना करना पड़ता था। पचास साल से लगातार नाम परिवर्तन की मांग हो रही थी।
वर्ष 2010 में निर्वाचित सरपंच हनुवंतसिंह ने ग्रामसभा का पहला प्रस्ताव गांव का नाम परिवर्तन करने का लिया। प्रस्ताव दफ्तर- दर-दफ्तर घूमता रहा और अफसर घूमाते रहे। गांव का नाम बदलने के तमाम तर्क को खारिज किया गया। ग्रामीणों के लिए बड़ा तर्क था कि गांव अल्पसंख्यक बाहुल्य नहीं है तो एेसा नाम क्यों? इससे उनको व्यावहारिक जीवन में रिश्तेदारी और सामाजिक आयोजन पर होने वाले सवाल-जवाब अखरते हैं।
फिर आया नियम- वर्ष 2012 में केंद्र सरकार की ओर से आए एक नियम में कहा गया कि किसी गांव का प्राचीन इतिहास या कोई नाम हो या फिर शहीद के नाम पर हो तो उसका नाम बदला जा सकता है। इस पर ग्राम पंचायत के प्रस्ताव में यह जोड़ा गया कि आजादी से पहले इस गांव का नाम महेश रो बाड़ो था। सेटलमेंट के दौरान सरकारी कार्मिकों की भूल से नाम बदला गया। यहां अल्पसंख्यक बाहुल्य लोग नहीं है। वर्ष 1965 में दो परिवार आए थे। एेतिहासिक प्रमाण के आधार पर नाम बदला जाए।
एेसे चली प्रक्रिया
- 2010 में पहली ग्राम सभा में किया गया निर्णय
- 2013 से 2017 तक चलती रही एेतिहासिक तथ्यों की पुष्टि की प्रक्रिया
-10 जुलाई 2017 को उपखण्ड अधिकारी ने की अनुशंसा
- 8 अगस्त 2017 को जिला कलक्टर ने राजस्व मण्डल को भेजा प्रस्ताव
- 9 नवंबर 2017 राजस्व मण्डल अजमेर ने की अनुशंसा
-14 दिसंबर 2017 को राज्य सरकार ने गृहमंत्रालय को भेजा पत्र
- 1 जून 2018 को राजपत्र में अधिसूचना
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अब रेलवे स्टेशन भी होगा महेशनगर
गृहमंत्रालय की अधिसूचना के बाद अब मियों का बाड़ा नाम के रेलवे स्टेशन का नाम भी महेश नगर करने की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी गई है।
50 साल की मांग पूरी हुई
पचास साल से गांव के लोगों की मांग थी। सरपंच बना तो पहला प्रस्ताव लिया। आठ साल तक लंबी प्रक्रिया अपनाई। फाइल के पीछे-पीछे चलता रहा। गांव से दिल्ली तक अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों से संपर्क करते हुए तथ्य पेश किए। तब गांव का नाम बदला गया है। गांव का नाम बदलने का कारण व्यावहारिक परेशानियां और एेतिहासिक तथ्य दोनों रहे।
-हनवंतसिंह, पूर्व सरपंच
प्रक्रियानुरूप हुआ
सबकुछ प्रक्रिया के अनुसार किया गया है। राजस्व बोर्ड अजमेर को फाइल भेजी गई थी। वहां से गांव का नाम परिवर्तन हुआ है। - शिव प्रसाद मदन नकाते, जिला कलक्टर