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सरकारी योजना vs बैंकिंग सिस्टम! कारीगरों तक नहीं पहुंच पा रहा कर्ज, PMEGP में बैंक बने सबसे बड़ी रुकावट

PMEGP Scheme: बस्तर संभाग से लाल आतंक का साया भले ही खत्म हो गया है, लेकिन इस आतंक ने आर्थिक प्रगति को भी कई दशक पीछे धकेल दिया है।

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Apr 06, 2026
सरकारी योजना vs बैंकिंग सिस्टम! कारीगरों तक नहीं पहुंच पा रहा कर्ज, PMEGP में बैंक बने सबसे बड़ी रुकावट(photo-patrika

PMEGP Scheme: छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग से लाल आतंक का साया भले ही खत्म हो गया है, लेकिन इस आतंक ने आर्थिक प्रगति को भी कई दशक पीछे धकेल दिया है। ऐसे कई उदाहरण हैं नक्सलवाद की वजह से सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं को पूरी तरह से अमल में नहीं लाया जा सका। इसका ताजा उदाहरण प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (पीएमईजीपी) में देखने को मिला।

PMEGP Scheme: PMEGP में बैंक बने सबसे बड़ी रुकावट

इसके तहत सूक्ष्म उद्योग लगाने और पारंपरिक कारीगरों को बैंकों के माध्यम से कर्ज दिया जाता है। वैसे तो राज्य में मिले कुल आवेदन के आधार पर बैंक करीब 40 फीसदी युवाओं को ही कर्ज दे सका, लेकिन सबसे खराब स्थिति बस्तर संभाग की दिखाई दी। वित्तीय वर्ष 2024-25 में बैंक ने सुकमा जिले में 16 और नारायणपुर जिले में 19 परियोजना को ही पीएमईजीपी के तहत कर्ज दिया।

जबकि सुकमा में 38 और नारायणपुर में 62 परियोजना के आवेदन थे। इसके कारण सूक्ष्म उद्योग की स्थापना में भी संभाग पिछड़ा नजर आ रहा है। पीएमईजीपी के तहत पिछले वित्तीय वर्ष में प्रदेशभर की 7 हजार 647 परियोजना के लिए बैंक में आवेदन किए गए। इनमें से 2 हजार 974 परियोजनाओं को ही मंजूरी दी गई और 36416.06 लाख रुपए जारी हुए।

यह है योजना

खादी और ग्रामोद्योग आयोग (केवीआईसी) के माध्यम से, मुख्यत: ग्रामीण क्षेत्रों में बैंक ऋण पर मार्जिन मनी (एमएम) सब्सिडी के रूप में वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है। इसके जरिए गैर-कृषि क्षेत्र में नए सूक्ष्म उद्यमों की स्थापना में उद्यमियों की सहायता के लिए पीएमईजीपी योजना संचालित है। इसका उद्देश्य पारंपरिक कारीगरों/ग्रामी रहा है। इसका उद्देश्य पारंपरिक कारीगरों/ग्रामीण और शहरी बेरोजगार युवाओं को उनके द्वार पर संधारणीय रोजगार के अवसर देना है।

इसके तहत अधिकतम परियोजना लागत विनिर्माण क्षेत्र के लिए 50 लाख रुपए और सेवा क्षेत्र के लिए 20 लाख रुपए कर दी गई है। विशेष श्रेणी के अंतर्गत उच्च सब्सिडी के लिए पात्र आकांक्षी जिलों और ट्रांसजेंडर आवेदकों को शामिल करना। इस योजना के तहत 20 लाख रुपए तक के ऋण वाली परियोजनाओं के लिए बैंक गारंटी की जरूरत नहीं है।

हेल्पलाइन नम्बर में कॉल स्वीकार नहीं

इस परियोजना के लिए छत्तीसगढ़ में हेल्पलाइन नम्बर जारी किया गया। पत्रिका ने जब हेल्पलाइन नम्बर 0771-2886428 पर कॉल किया जो वहां से जवाब आया कि इस नम्बर पर कोई कॉल स्वीकार नहीं कर रहा है।

इन कामों के लिए मिल सकती है सहायता

पीएमईजीपी के अंतर्गत, सूक्ष्म उद्यमों को छत्तीसगढ़ सहित पूरे देश में विनिर्माण (मैन्युफैक्चङ्क्षरग) और सेवा-दोनों क्षेत्रों में स्थानीय कौशल, संसाधनों और उद्यमशीलता रुचि के आधार पर सहायता प्रदान की जाती है। इसमें कृषि आधारित खाद्य प्रसंस्करण उद्योग, वन आधारित उद्योग, हस्तनिर्मित कागज और फाइबर उद्योग, खनिज आधारित उद्योग, पॉलिमर और रसायन आधारित उद्योग, ग्रामीण इंजीनियङ्क्षरग और बायो-टेक उद्योग और सेवा एवं वस्त्र उद्योग सहित ग्रामीण और ग्रामोद्योग के अंतर्गत चिन्हित क्रियाकलाप शामिल हैं।

बस्तर संभाग में पीएमईजीपी की स्थिति

जिला परियोजनाएं बैंक द्वारा संस्वीकृति राशि (लाख में)
बस्तर 316 85 656.42
बीजापुर 113 37 199.01
दंतेवाड़ा 104 44 255.68
कांकेर 344 96 599.33
कोंडागांव 221 92 652.47
नारायणपुर 62 19 113.48
सुकमा 38 16 90.22

इन पांच जिलों में सबसे ज्यादा लाभ

जिला परियोजनाएं बैंक द्वारा संस्वीकृति राशि (लाख में)
बिलासपुर 634 180 2971.89
रायपुर 487 213 3142.67
जांजगीर-चांपा 479 226 2748.30
दुर्ग 449 182 2847.60
धमतरी 384 108 1123.57

Published on:
06 Apr 2026 09:04 am
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