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Baster News: बस्तर की वादियों में चहकी पहाड़ी मैना, रंग लाई 3 साल की कड़ी मेहनत, दोगुना हुआ कुनबा

Baster News: पहाड़ी मैना के संरक्षण में सबसे बड़ी भूमिका साल 2022 में शुरू हुए मैना मित्र अभियान की रही है। उद्यान प्रबंधन ने कांगेर घाटी की सीमा से लगे करीब 40 गांवों के स्थानीय युवाओं को प्रशिक्षित कर उन्हें संरक्षण कार्य की मुख्यधारा से जोड़ा।
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Apr 24, 2026
Baster News: बस्तर की वादियों में चहकी पहाड़ी मैना, रंग लाई 3 साल की कड़ी मेहनत, दोगुना हुआ कुनबा
बस्तर की वादियों में चहकी पहाड़ी मैना (Photo AI)

Baster News: बस्तर के कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान की वादियों से एक सुखद खबर सामने आई है। इंसानी आवाज की हूबहू नकल करने में माहिर छत्तीसगढ़ का राजकीय पक्षी पहाड़ी मैना अब विलुप्ति के खतरे से बाहर निकलकर अपनी आबादी बढ़ा रहा है। पिछले तीन वर्षों से जारी सघन संरक्षण प्रयासों का ही परिणाम है कि आज जंगलों में इनकी संख्या 600 के पार पहुंच गई है, जिसके इस वर्ष बढ़कर 1200 से अधिक होने की उम्मीद जताई जा रही है।

पहाड़ी मैना के संरक्षण में सबसे बड़ी भूमिका साल 2022 में शुरू हुए मैना मित्र अभियान की रही है। उद्यान प्रबंधन ने कांगेर घाटी की सीमा से लगे करीब 40 गांवों के स्थानीय युवाओं को प्रशिक्षित कर उन्हें संरक्षण कार्य की मुख्यधारा से जोड़ा। ये युवा न केवल पक्षियों की निगरानी कर रहे हैं, बल्कि शिकार और अवैध व्यापार को रोकने के लिए ग्रामीणों के बीच जागरूकता भी फैला रहे हैं। युवाओं की इस सक्रिय भागीदारी ने मैना के लिए एक सुरक्षित वातावरण तैयार किया है।

ईको-टूरिज्म और आजीविका का मेल से जोड़ा

पहाड़ी मैना के संरक्षण को अब ईको-टूरिज्म से भी जोड़ दिया गया है। पर्यटक अब बस्तर की खूबसूरती के साथ-साथ बर्ड वाचिंग (पक्षी दर्शन) का आनंद भी ले रहे हैं। धुडमारास जैसे क्षेत्रों में होम स्टे संचालित करने वाले मानसिंह बघेल बताते हैं कि मैना का उनके घर के आसपास दिखना अब गर्व का विषय बन गया है। पर्यटन बढ़ने से स्थानीय लोगों को रोजगार मिल रहा है, जिससे वे इस पक्षी को बचाने के प्रति और अधिक समर्पित हुए हैं।

प्राकृतिक घोंसलों की सुरक्षा पर विशेष ध्यान

पहाड़ी मैना की एक विशेषता यह है कि वह अपना घर खुद बनाने के बजाय कठफोड़वा पक्षी द्वारा साल के सूखे पेड़ों में बनाए गए घोंसलों का उपयोग करती है। इसकी गंभीरता को देखते हुए वन विभाग ने कांगेर घाटी क्षेत्र में सूखे पेड़ों की कटाई पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है। पिछले सर्वेक्षण में करीब 250 सक्रिय घोंसलों में मैना की मौजूदगी दर्ज की गई थी।

मार्च से जून तक का समय पहाड़ी मैना का मुख्य प्रजनन काल होता है। मानसून आने से पहले ये पक्षी अपनी संख्या बढ़ाते हैं। इस दौरान विभाग विशेष निगरानी दल तैनात कर घोंसलों की सुरक्षा सुनिश्चित कर रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यही गति बनी रही, तो बस्तर की पहचान यह राजकीय पक्षी जल्द ही अपने पुराने गौरवपूर्ण आंकड़ों को हासिल कर लेगा।

नवीन कुमार, डायरेक्टर, कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान

Updated on:
24 Apr 2026 05:20 pm
Published on:
24 Apr 2026 05:18 pm