International Coffee Day: बहुत कम लोग जानते हैं कि मध्यप्रदेश में भी एक ऐसी जगह है जहां कॉफी की खेती की जाती है। और इस कॉफी बागान की खासियत ये है कि यह एक बेस्ट टूरिस्ट प्लेस है, जहां देश-विदेश से टूरिस्ट पहुंचते हैं।
International Coffee Day: चाय की ही तरह कॉफी के दीवाने आपको हर जगह मिल जाएंगे। अपने अलग-अलग स्वाद के चलते ये पूरी दुनिया में लोकप्रिय है। भारत के कुछ हिस्सों में इसके बड़े बागान हैं, जहां इसकी खेती की जाती है। ज्यादातर लोगों की जबान पर कॉफी का नाम सुनते ही कर्नाटक, केरल या फिर तमिलनाडु का नाम सबसे पहले आता है। क्योंकि इन जगहों पर भारी मात्रा में कॉफी की खेती की जाती है। लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि मध्यप्रदेश में भी एक ऐसी जगह है जहां कॉफी की खेती की जाती है। और इस कॉफी बागान की खासियत ये भी है कि यह एक बेस्ट टूरिस्ट प्लेस भी है, जहां देश-विदेश से टूरिस्ट पहुंचते हैं।
1 अक्टूबर को दुनियाभर में अन्तर्राष्ट्रीय कॉफी डे मनाया जाता है। इस खास दिन पर जानते हैं मध्यप्रदेश के एकमात्र कॉफी बागान के बारे में जो बैतूल जिले में मौजूद है। इसकी खूबसूरती ऐसी कि ये सतपुडा की रानी कहे जाने वाली पचमढ़ी को भी बराबर की टक्कर देता है।
मध्य प्रदेश के बैतूल जिले में स्थित कुकरू में मध्यप्रदेश का एक मात्र कॉफी बागान है। ये बागान अपनी उत्तम किस्म के चलते दुनियाभर में काफी लोकप्रिय है। भैंसदेही तहसील के कुकरू में अरेबिक उद्यान में ये कॉफी के बागान मौजूद हैं।
सालों पहले जब भारत में ब्रिटिश शासन था, तब कुकरू अंग्रेजी हुकूमत की पसंसीदा जगहों में शामिल था। लगभग 1906 के आस-पास अंग्रेजों ने इसे अपने आराम करने की जगह बना लिया। वहीं साल 1944 में अंग्रेज महिला मिस फोलरेंस हैंड्रिक्स ने 160 एकड़ की खेती में कॉफी का बागान लगाया। आजादी के बाद विदेशी तो अपने घर लौट गए लेकिन, कॉफी का ये बागान आज भी अपनी शान बनाए हुए है।
कुकरू न केवल उत्तम किस्म के कॉफी उत्पादन के लिए चर्चित है बल्कि, इसकी खूबसूरती के लिए भी देशभर में लोकप्रिय है। यहां के नजारों का लुत्फ उठाने के लिए दूर-दूर से टूरिस्ट आते रहते हैं। ऊंचे पहाड़ों पर बिछी हरियाली हर किसी के मन को मोह लेती है। मिनी पचमढ़ी नाम से मशहूर कुकरू में सन सेट देखने का मजा ही कुछ और है। भोडियां कुंड, मंजर पॉइंट, बुच पॉइंट कुकरू के आकर्षणों में से एक है।