बैतूल। शहर के गंज क्षेत्र स्थित हाथी नाले में बड़ी मात्रा में एक्सपायरी दवाएं फेंके जाने का मामला सामने आना न सिर्फ प्रशासनिक लापरवाही को उजागर करता है, बल्कि यह सीधे तौर पर आमजन के स्वास्थ्य और पर्यावरण के लिए गंभीर खतरा भी पैदा करता है। जिन दवाओं का नियमानुसार सुरक्षित और वैज्ञानिक तरीके से […]
बैतूल। शहर के गंज क्षेत्र स्थित हाथी नाले में बड़ी मात्रा में एक्सपायरी दवाएं फेंके जाने का मामला सामने आना न सिर्फ प्रशासनिक लापरवाही को उजागर करता है, बल्कि यह सीधे तौर पर आमजन के स्वास्थ्य और पर्यावरण के लिए गंभीर खतरा भी पैदा करता है। जिन दवाओं का नियमानुसार सुरक्षित और वैज्ञानिक तरीके से नष्टीकरण किया जाना था, उन्हें खुले में नाले में फेंक दिया गया। यह सवाल खड़ा करता है कि आखिर जिम्मेदार कौन है और अब तक ऐसी घटनाओं पर प्रभावी निगरानी क्यों नहीं की जा रही।
स्थानीय लोगों द्वारा नाले में थोक में पड़ी एक्सपायरी दवाएं देखे जाने के बाद तत्काल इसकी सूचना सिविल सर्जन को दी गई। मामला औषधि प्रशासन विभाग से जुड़ा होने के कारण सिविल सर्जन ने ड्रग इंस्पेक्टर को अवगत कराया। सूचना मिलते ही औषधि प्रशासन हरकत में आया और ड्रग इंस्पेक्टर ने मौके पर पहुंचकर एक्सपायरी दवाओं की जब्ती की। प्रारंभिक जांच में यह स्पष्ट हुआ कि ये दवाएं सरकारी सप्लाई की नहीं हैं, बल्कि किसी निजी मेडिकल स्टोर या निजी अस्पताल से संबंधित हो सकती हैं। यह घटना कई गंभीर सवाल खड़े करती है। एक्सपायरी दवाओं में मौजूद रसायन पानी और मिट्टी में मिलकर पर्यावरण को नुकसान पहुंचा सकते हैं। नाले के जरिए ये जहरीले तत्व आगे जाकर जल स्रोतों तक पहुंच सकते हैं, जिससे मानव और पशु जीवन पर दुष्प्रभाव पडऩा तय है। इसके बावजूद निजी संस्थानों द्वारा नियमों की खुलेआम अनदेखी किया जाना चिंताजनक है। ड्रग इंस्पेक्टर के अनुसार, जब्त की गई दवाओं के बैच नंबर के आधार पर यह पता लगाया जाएगा कि ये दवाएं किस फार्मेसी कंपनी की हैं और इन्हें किस थोक विक्रेता या मेडिकल स्टोर को सप्लाई किया गया था। इसके बाद ही दोषियों के खिलाफ नियमों के तहत कार्रवाई की जाएगी। हालांकि सवाल यह है कि क्या केवल जांच और जब्ती से भविष्य में ऐसी घटनाएं रुक पाएंगी? शहर में पहले भी जैव-चिकित्सकीय कचरे के अव्यवस्थित नष्टीकरण के मामले सामने आते रहे हैं, लेकिन ठोस और सख्त कार्रवाई के अभाव में लापरवाही दोहराई जा रही है। अब जरूरत है कि औषधि प्रशासन केवल कागजी कार्रवाई तक सीमित न रहकर दोषियों पर कठोर दंडात्मक कार्रवाई करे, ताकि निजी मेडिकल स्टोर और अस्पताल नियमों का पालन करने को मजबूर हों।
इनका कहना