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कौन सा ग्रह पलट सकता है तकदीर, जानें सभी लग्नों के कारक, अकारक और मारक ग्रह

benefic non-benefic and maraka planets : सभी 12 लग्नों के कारक, अकारक और मारक ग्रहों की महादशाएं करती हैं शुभ अशुभ समय का निर्धारण
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Aug 18, 2026
Navgrah
Navgrah (photo- grok ai)

benefic planets : जीवन में सभी लोग सफल होना चाहते हैं, धन-संपत्ति, अच्छे करियर और सुख-समृद्धि की कामना करते हैं। हालांकि अधिकांश लोगों को इसके लिए अथक संघर्ष करना पड़ता है। वैदिक ज्योतिष के अनुसार जातक की कुंडली में नवग्रहों की स्थिति और महादशाओं का प्रभाव, उसका भाग्य बदल सकते हैं। कारक और शुभ ग्रहों की दशाएं जहां अनुकूल फल देते हुए सुख-समृद्धि प्रदान करती हैं वहीं अकारक, मारक ग्रहों की दशा में अशुभ फल मिलते हैं। ज्योतिष ग्रंथों के अनुसार लग्नानुसार शुभ और कारक ग्रह की दशा, प्राय: जातक की तकदीर पलट देती है।

ज्योतिषाचार्य पंडित सोमेश परसाई बताते हैं कि सभी 9 ग्रहों में पारस्परिक मित्रता और शत्रुता होती है। कुछ ग्रह एक दूसरे के प्रति तटस्थ भाव भी रखते हैं। प्राय: केंद्र (1, 4, 7, 10) या त्रिकोण (1, 5, 9) भावों में स्थित ग्रह अच्छा फल देते हैं। उच्च राशि, स्वराशि में स्थित होने या उस पर शुभ ग्रहों की दृष्टि पड़ने पर उसकी महादशा भाग्यवर्धक मानी जाती है। इसके उलट 6, 8 या 12 वें भाव में स्थित ग्रहों की दशाएं जीवन की कठिनाएं बढ़ा सकती हैं।

सभी 12 लग्नों के अलग-अलग कारक, अकारक और मारक ग्रह

वैदिक ज्योतिष में सभी 12 लग्नों के अलग अलग कारक, अकारक और मारक ग्रह भी हैं। कारक ग्रह (शुभ व लाभ देने वाले), अकारक ग्रह (उदासीन या अशुभ फल देने वाले) और मारक ग्रह (कष्ट या मृत्युतुल्य पीड़ा देने वाले) का निर्धारण लग्न के आधार पर ही होता है।

त्रिकोण (1, 5, 9) के स्वामी कारक और द्वितीय एवं सप्तम भाव के स्वामी मारक

ज्योतिषाचार्य पंडित अरुण बुचके के अनुसार सामान्य नियम यह है कि त्रिकोण (1, 5, 9) के स्वामी कारक और द्वितीय एवं सप्तम भाव के स्वामी मारक होते हैं।

  1. मेष लग्न (Aries)कारक (योगकारक): सूर्य, मंगल, बृहस्पति (विशेष योगकारक)।मारक: शुक्र (द्वितीय व सप्तमेश होने के कारण), शनि।अकारक: बुध और चंद्रमा (अशुभ फलदायक हो सकते हैं)।
  2. वृषभ लग्न (Taurus)कारक (योगकारक): शनि (9वें व 10वें भाव का स्वामी), बुध।मारक: मंगल (7वें व 12वें भाव का स्वामी), बृहस्पति, सूर्य।अकारक: चंद्रमा और गुरु।
  3. मिथुन लग्न (Gemini)कारक (योगकारक): शुक्र (पंचम व दशमेश), शनि, बुध।मारक: बृहस्पति (7वें और 10वें/4थे का स्वामी), मंगल (6वें व 11वें का स्वामी)।अकारक: सूर्य और चंद्रमा।
  4. कर्क लग्न (Cancer)कारक (योगकारक): मंगल (5वें व 10वें के स्वामी), बृहस्पति, चंद्रमा।मारक: शनि (7वें व 8वेंेश), सूर्य (2रेश मारकेश)।अकारक: बुध और शुक्र।
  5. सिंह लग्न (Leo)कारक (योगकारक): मंगल (4थे व 9वें), सूर्य, बृहस्पति।मारक: शनि (6वें व 7वेंेश), शुक्र।अकारक: बुध और चंद्रमा।
  6. कन्या लग्न (Virgo)कारक (योगकारक): शुक्र (भाग्येश व 2रेश), बुध।मारक: बृहस्पति (4थे व 7वें), मंगल, सूर्य।अकारक: शनि (पंचमेश होने पर भी मारक प्रभाव देता है) और चंद्रमा।
  7. तुला लग्न (Libra)कारक (योगकारक): शनि (4थे व 5वें के स्वागी), बुध, शुक्र।मारक: मंगल (2रेश व 7वें के स्वामी), सूर्य, बृहस्पति।अकारक: चंद्रमा (10वें के स्वामी होकर भी अकारक)।
  8. वृश्चिक लग्न (Scorpio)कारक (योगकारक): सूर्य (10), चंद्रमा (9), बृहस्पति।मारक: शुक्र (7वें व 12 के स्वामी), बुध।अकारक: शनि (3रे व 4थेेश)।
  9. धनु लग्न (Sagittarius)कारक (योगकारक): सूर्य (9वें के स्वामी), मंगल, बृहस्पति।मारक: बुध (7वें व 10वें स्वामी), शुक्र।अकारक: शनि (2रेश व 3रेेश)।
  10. मकर लग्न (Capricorn)कारक (योगकारक): शुक्र (5वें व 10वें स्वामी), बुध।मारक: चंद्रमा (7वें स्वामी), सूर्य, बृहस्पति, मंगल।अकारक: मंगल और बृहस्पति।
  11. कुंभ लग्न (Aquarius)कारक (योगकारक): शुक्र (4थे व 9वें स्वामी), शनि।मारक: सूर्य (7वें स्वामी), बृहस्पति, चंद्रमा।अकारक: मंगल और बुध।
  12. मीन लग्न (Pisces)कारक (योगकारक): मंगल (9वें व 2रेश), चंद्रमा, सूर्य।मारक: बुध (7वें व 4थेेश), शनि, शुक्र।अकारक: शनि और सूर्य (स्थिति के अनुसार)।

ध्यान रखें: ग्रहों के कारक, अकारक और मारक फल, कुंडली में उनकी तात्कालिक स्थिति, अंशबल, युति और महादशा पर भी निर्भर करते हैं।

Updated on:
18 Aug 2026 01:58 pm
Published on:
18 Aug 2026 01:58 pm