भारत

Janmashtami 2026 : श्रीकृष्ण के लाइफ मैनेजमेंट के 5 सूत्र बदल सकते हैं जीवन

Janmashtami 2026 : जन्माष्टमी के मौके पर श्रीकृष्ण के ​जीवन के जरिए प्रबंधन की बात, भगवान ने भी मानवीय चरित्र को जिया
2 min read
• •
Updated: 4 Sep 2026, 11:06 AM IST
श्रीकृष्ण के लाइफ मैनेजमेंट के सूत्र
श्रीकृष्ण के लाइफ मैनेजमेंट के सूत्र : फोटो सोर्स : AI Grok

Janmashtami :  देश दुनिया में जन्माष्टमी की धूम शुरु हो चुकी है। श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव पर मुख्य पूजा रात को की जाएगी पर घरोेें-मंदिरों में जय कन्हैया लाल की… के स्वर सुबह से ही गूंज रहे हैं। व्रत रखकर लोग गीता पाठ कर रहे हैं। महाभारत युद्ध के पहले श्रीकृष्ण ने गीता के उपदेश के माध्यम से कर्म की महत्ता प्रतिपादित की थी। वे दरअसल मैंनेजमेंट गुरु थी थे। भगवान कृष्ण के संपूर्ण जीवन में ही लाइफ मैनेजमेंट के अनेक सूत्र छिपे हैं।

कृष्ण केवल ईश्वर ही नहीं हैं बल्कि मानव चरित्र और व्यवहार में उतारे जाने वाले देव

आचार्य पंडित सोमेश परसाई के अनुसार कृष्ण केवल मॉयथोलॉजी के एक पात्र या ईश्वर ही नहीं हैं बल्कि वे मानव चरित्र और व्यवहार में उतारे जाने वाले देव हैं। श्रीकृष्ण के जीवन सूत्रों से जीवन को श्रेष्ठ बनाने की कला सीखी जा सकती है।

  1. रिश्ते नातों का निभाना ही जीवन है

बचपन के मित्र सुदामा और उद्धव से लेकर युवावस्था में मिले अर्जुन तक से श्रीकृष्ण ने ताउम्र रिश्ते निभाए। जिन्हें अपना माना, उनका साथ कभी और किसी भी परिस्थिति में नहीं छोड़ा।

  1. नेतृत्व करना जरूरी पर श्रेय के लिए नहीं

श्रीकृष्ण ने जीवनभर अन्याय, अत्याचार का विरोध किया। बचपन में ही कंस से भिड़े। दुर्योधन, जरासंघ आदि की नीतियों के खिलाफ आगे आकर नेतृत्व किया पर कभी भी श्रेय लेने के लिए आगे नहीं आए। हमेशा किंगमेकर की भूमिका निभाई।

  1. विकास के लिए शांति जरूरी

श्रीकृष्ण ने हमेशा जन आकांक्षाओं और विकास पर जोर दिया। इसके लिए शांति की महत्ता भी बताई। यही कारण है कि संसार को विभीषिका से बचाने के लिए महाभारत का युद्ध टालने की हर संभव कोशिश की। कौरवों और पांडवों के बीच मध्यस्थता कर यह समझाने का प्रयास किया कि शांति का मार्ग ही ​उचित उपाय है।

  1. जीवन एक संघर्ष है

श्रीकृष्ण का पूरा जीवन संघर्षमय रहा। उन्होंने समझाया कि अवतारी पुरुष को भी सांसारिक चुनौतियां झेलनी होंगी, इससे कोई मानव नहीं बच सकता। कृष्ण ने परिस्थितियों का हर हाल में सामना करने की सीख दी।

  1. भगवान कृष्ण ने उज्जैन में रहकर केवल वैदिक ज्ञान ही हासिल नहीं किया बल्कि 64 दिन में 64 कलाएं भी सीख लीं थी। उन्होंने बहुआयामी शिक्षा पर जोर दिया।
Updated on:
4 Sep 2026, 11:06 AM IST
Published on: