
राजस्थान की राजनीति और भरतपुर जिले के बयाना क्षेत्र से एक दुखद और सनसनीखेज खबर सामने आई है। भरतपुर जिले की बयाना विधानसभा सीट से पूर्व विधायक रहे दिग्गज गुर्जर नेता अतर सिंह भड़ाना का एक हिंसक घटनाक्रम के बाद आकस्मिक निधन हो गया है। अतर सिंह भड़ाना न केवल पूर्वी राजस्थान की राजनीति में अपनी मजबूत पकड़ और बेबाक अंदाज के लिए जाने जाते थे, बल्कि उन्होंने अपने परिवार को भी शिक्षा और प्रशासनिक सेवा के सर्वोच्च शिखर तक पहुंचाया। वे अपने पीछे एक ऐसा समृद्ध और शिक्षित परिवार छोड़ गए हैं, जो समाज में एक मिसाल के रूप में देखा जाता है।
अतर सिंह भड़ाना के परिवार में उनके इकलौते पुत्र और चार बेटियां हैं। उन्होंने अपने सभी बच्चों को उच्च शिक्षा दिलाकर देश के प्रतिष्ठित पदों तक पहुंचाया है। उनके निधन की खबर से न केवल राजनीतिक गलियारों और भरतपुर संभाग में शोक की लहर दौड़ गई है, बल्कि प्रशासनिक और कानूनी हलकों में भी उनके प्रति संवेदनाएं व्यक्त की जा रही हैं।
दिवंगत पूर्व विधायक अतर सिंह भड़ाना की सबसे छोटी पुत्री किरण भड़ाना भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) की 2017 बैच की एक बेहद काबिल अधिकारी हैं। वर्तमान में वे हिमाचल प्रदेश कैडर में अपनी सेवाएं दे रही हैं और उपायुक्त (कानून एवं सुरक्षा), लाहौल एवं स्पीति के पद पर कार्यरत हैं।
किरण भड़ाना ने अपनी मेहनत और पिता के मार्गदर्शन के बल पर संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की कठिन परीक्षा में सफलता हासिल कर पूरे राजस्थान और अपने समाज का नाम रोशन किया था। पिता के निधन की दुखद सूचना मिलने के बाद वे तुरंत राजस्थान के लिए रवाना हो गईं।
अतर सिंह भड़ाना के इकलौते बेटे अर्जुन सिंह भड़ाना देश की सबसे बड़ी अदालत यानी सुप्रीम कोर्ट में वकील के रूप में कार्यरत हैं। अर्जुन भड़ाना दिल्ली में वकालत के क्षेत्र में अपनी मजबूत पहचान बना चुके हैं और कई महत्वपूर्ण कानूनी मामलों की पैरवी करते हैं।
पिता के राजनीतिक और सामाजिक जीवन में अर्जुन सिंह भड़ाना हमेशा एक मजबूत स्तंभ की तरह उनके साथ खड़े रहे। अपने पिता के क्रेशर प्लांट पर हुए अचानक हमले और उनके असामयिक निधन से अर्जुन भड़ाना और पूरे परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है।
पूर्व विधायक अतर सिंह भड़ाना ने हमेशा बेटियों की शिक्षा और उनके सशक्तिकरण पर विशेष जोर दिया। उनकी अन्य तीन पुत्रियों में से एक पुत्री पेशे से डॉक्टर (चिकित्सक) हैं और स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में समाज की सेवा कर रही हैं। वहीं, उनकी दो अन्य पुत्रियां सुशिक्षित गृहिणी हैं जो अपने-अपने परिवारों की जिम्मेदारी संभाल रही हैं।
अतर सिंह भड़ाना ने अपनी जमीनी राजनीति और माइनिंग व्यवसाय के साथ-साथ अपने बच्चों की परवरिश में कभी कोई कमी नहीं आने दी। राजस्थान के पूर्वी क्षेत्र में गुर्जर समाज के लोग अतर सिंह भड़ाना को एक ऐसे अभिभावक के रूप में भी याद करते हैं जिन्होंने अपने बच्चों को प्रशासनिक और कानूनी सेवाओं के सर्वोच्च मुकाम तक पहुंचाया। उनके निधन से पूरा भड़ाना परिवार और उनके समर्थक गहरे शोक में हैं।
कमलेश भड़ाना सक्रिय रूप से मुख्यधारा की चुनावी राजनीति या किसी बड़े राजनैतिक पद पर नहीं रही हैं। हालाँकि, पूर्व विधायक की पत्नी होने के नाते वह क्षेत्र और सामाजिक मामलों में सक्रिय रही हैं। हाल ही में उनके पति पर हुए हमले और उनके निधन के बाद, उन्होंने पुलिस और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए न्याय की माँग की है और मीडिया के सामने प्रखरता से अपनी बात रखी है।