निगम प्रशासन ने वर्ष-2017 के वित्तीय दस्तावेजों को ऑडिट के लिए निजी एजेंसी को सौंपा ही नहीं है। ऑडिट में जमकर ढिलाई बरती गई।
भिलाई . राज्य शासन ने वित्तीय अनियमितता रोकने के उद्देश्य से प्रदेश के सभी नगरीय निकायों के लेखा-जोखा की ऑडिट के लिए निजी एजेंसियों को ठेका दे रखा है। बावजूद भिलाई नगर निगम के आय-व्यय से संबंधित दस्तावेजों की जांच ही नहीं हो रही है। स्थिति यह है कि निगम प्रशासन ने वर्ष-२०१७ के वित्तीय दस्तावेजों को ऑडिट के लिए निजी एजेंसी को सौंपा ही नहीं है। ऑडिट में जमकर ढिलाई बरती गई। स्वास्थ्य विभाग के अफसरों ने इसका फायदा उठाया और डीजल घोटाले को अंजाम दे डाला। वहीं जानबूझकर की गई लेटलतीफी की वजह से अब निजी एजेंसी को पांच जोन के ९५ वाहनों के ईंधन खर्च की ऑडिट में कई माह लग जाएंगे। लॉगबुक में ३० की बजाय अप्रैल माह में ३१ दिन दर्शाया गया है। वाहन चालकों को ३१ दिन तक ईंधन का टोकन जारी किया गया है।
ऑडिट एजेंसी ने यह कहा
एस पोद्दार एसोसिएट्स के संचालक ने बताया कि पिछले वर्ष के आय-व्यय से संबंधित दस्तावेज ऑडिट के लिए मेरे पास नहीं आए हंै। दस्तावेज देखने के बाद ही कुछ कहा जा सकेगा। वित्तीय वर्ष के बिल का पहले वेरीफाई किया जाता है। इसके बाद ही बिल भुगतान के सिस्टम को फॉलो किया जा रहा है।
ईंधन खर्च में 3 करोड़ का घपला उजागर
सदन में इस बात का खुलासा हुआ है कि वित्तीय वर्ष २०१६-१७ में नेहरू नगर जोन में सफाई के ७ एपे, १ डंपर प्लेजर, १ कॉम्पेक्टर, २ डंपर, १ बैकहो लोडर, सहित कुल १३ वाहनों का उपयोग किया गया। अप्रैल में ३० दिन होते हैं। उसमें विभाग ने ३१ दिन तक वाहनों को ईंधन का टोकन दिया है। १ दिन में १३ वाहनों के लिए २२० लीटर डीजल वितरण किया गया है। डंपर, एपे और बैकहो लोडर खराब हंै। उन वाहनों के क्रमांक से भी डीजल का टोकन जारी हुआ है। इसी तरह वैशाली नगर, मदर टेरेसा, वीर शिवाजी नगर और रिसाली जोन के वाहनों के ईंधन पर मनमाना खर्च हुआ है। सालभर में ईंधन खर्च में लगभग ३ करोड़ की अनियमितता की बात सामने आई है।
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