आत्मा योजना: उत्तर प्रदेश, दिल्ली और उत्तराखंड के प्रमुख कृषि संस्थानों में सीखेंगे खेती की आधुनिक तकनीक भीलवाड़ा जिले के किसानों को आधुनिक खेती, पशुपालन और उन्नत बागवानी की बारीकियों से रूबरू कराने के लिए राजस्थान सरकार की आत्मा’ योजना के तहत 7 दिवसीय अंतरराज्यीय भ्रमण कार्यक्रम रविवार से शुरू हुआ। जिले की 13 पंचायत […]
भीलवाड़ा जिले के किसानों को आधुनिक खेती, पशुपालन और उन्नत बागवानी की बारीकियों से रूबरू कराने के लिए राजस्थान सरकार की आत्मा' योजना के तहत 7 दिवसीय अंतरराज्यीय भ्रमण कार्यक्रम रविवार से शुरू हुआ। जिले की 13 पंचायत समितियों से चयनित 50 प्रगतिशील किसानों का दल रविवार दोपहर एक बजे अजमेर चौराहा स्थित उप निदेशक कृषि कार्यालय से रवाना होगा। यह दल राजस्थान के साथ-साथ उत्तर प्रदेश, दिल्ली और उत्तराखंड के शीर्ष कृषि अनुसंधान केंद्रों का दौरा करेगा।
7 दिनों के इस सघन दौरे में किसान वैज्ञानिक पद्धति से रूबरू होंगे। भ्रमण के दौरान मुख्य आकर्षण केंद्र मथुरा के केंद्रीय बकरी अनुसंधान संस्थान और पं. दीनदयाल पशु चिकित्सा विज्ञान विवि। मेरठ में सरदार वल्लभ भाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय। देहरादून में केंद्रीय मृदा एवं जल संरक्षण अनुसंधान संस्थान तथा केंद्रीय वानिकी संस्थान तथा दिल्ली में भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (पूसा), राष्ट्रीय समन्वित कीट प्रबंधन केंद्र और आजादपुर सब्जी मंडी होगी।
आत्मा परियोजना निदेशक संतोष कुमार तंवर ने बताया कि इस भ्रमण दल में भीलवाड़ा की सभी पंचायत समितियों को प्रतिनिधित्व दिया गया है। आसींद, बनेड़ा, बिजौलिया, हुरड़ा, जहाजपुर, करेड़ा, कोटड़ी, माण्डल, माण्डलगढ़, सहाड़ा और शाहपुरा से 4-4 तथा रायपुर व सुवाणा से 3-3 किसानों का चयन किया गया है। चयन प्रक्रिया में लघु, सीमांत, अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के किसानों को प्राथमिकता दी गई है। साथ ही, 50 वर्ष से कम उम्र के युवा किसानों को तरजीह दी गई है ताकि वे नई तकनीक को लंबे समय तक अपने खेतों में लागू कर सकें।
इस भ्रमण को केवल औपचारिकता तक सीमित न रखकर परिणामोन्मुखी बनाया है। भ्रमण प्रभारी विनोद कुमार माण्या और सह-प्रभारी शीशपाल गुर्जर के निर्देशन में किसान जो भी तकनीक सीखेंगे, उसका पूरा रिकॉर्ड रखा जाएगा। भ्रमण से लौटने के छह माह बाद विभाग किसानों का फॉलोअप लेगा कि उन्होंने अपने क्षेत्रों में कौन सी नई तकनीक अपनाई।
7 दिवसीय यात्रा के दौरान बस में सीटों की कमी को लेकर किसानों ने विरोध किया। किसानों का कहना था कि भ्रमण के लिए मंगवाई गई बस में पर्याप्त क्षमता नहीं थी। नियमानुसार 52 सीटों की आवश्यकता थी, जबकि बस में 48 सीटें ही थीं। इस बस में न केवल 50 किसान, बल्कि दो प्रभारी अधिकारी और अन्य कर्मचारी भी सवार थे। उधर आत्मा परियोजना निदेशक संतोष कुमार तंवर का कहना है कि जिले से कुल 50 किसानों को आमंत्रित किया था, लेकिन मौके पर संख्या अधिक होने के कारण कुछ समस्या आई। जिन किसानों को इस बार जगह नहीं मिल पाई है, उन्हें अगले चरण के भ्रमण में प्राथमिकता के साथ ले जाने का आश्वासन दिया गया है।