भीलवाड़ा

देश के डिजिटल भविष्य की ओर बड़ा कदम, देश की पहली डिजिटल जनगणना का शंखनाद

एक अप्रेल से शुरू होगा पहले चरण का महाभियान जो 30 सितंबर तक चलेगा, अधिसूचना जारी

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Jan 09, 2026
A major step towards the country's digital future: the launch of India's first digital census.

भारत के जनसांख्यिकीय इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ने जा रहा है। केंद्र सरकार ने देश की पहली 'डिजिटल जनगणना' के लिए औपचारिक बिगुल फूंक दिया है। केंद्रीय गृह मंत्रालय की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार जनगणना 2027 के पहले चरण की प्रक्रिया 1 अप्रेल 2026 से शुरू होकर 30 सितंबर 2026 तक चलेगी। इस छह महीने की अवधि में देश के प्रत्येक घर की चौखट पर दस्तक दी जाएगी।

30 लाख 'डिजिटल सिपाही' जुटाएंगे डेटा

इस बार की जनगणना पारंपरिक कागज-कलम के बजाय पूरी तरह हाईटेक होगी। देशभर में लगभग 30 लाख प्रगणक (कर्मी) इस महाभियान में तैनात किए जाएंगे। ये कर्मी मोबाइल ऐप और डिजिटल उपकरणों के माध्यम से रियल-टाइम डेटा संग्रह करेंगे। इससे आंकड़ों में सटीकता बढ़ेगी और गणना में लगने वाला समय कम होगा।

क्या होगा पहले चरण में

पहले चरण को 'हाउसलिस्टिंग ऑपरेशंस' (मकानों की सूचीकरण) नाम दिया गया है। इसमें मुख्य रूप से दो कार्य होंगे। इसमें देश में मौजूद सभी मकानों, उनकी स्थिति और सुविधाओं का विवरण दर्ज करना होगा। घरों में उपलब्ध बुनियादी सुविधाओं और संपत्तियों का डेटा जुटाना होगा। प्रत्येक राज्य और केंद्र शासित प्रदेश अपनी प्रशासनिक सुविधा के अनुसार 1 अप्रेल से 30 सितंबर के बीच अपनी विशिष्ट समय सीमा निर्धारित करेंगे।

खास बातें: जो आपको जाननी जरूरी हैं

पूरी तरह पेपरलेस तथा पहली बार डेटा सीधे क्लाउड सर्वर पर अपलोड होगा। नागरिकों को खुद का विवरण ऑनलाइन भरने का विकल्प भी मिल सकता है। इस डेटा का उपयोग भविष्य की सरकारी योजनाओं, परिसीमन और संसाधनों के आवंटन में आधार के रूप में किया जाएगा। गृह मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि एकत्रित डेटा पूरी तरह सुरक्षित और गोपनीय रखा जाएगा।

कोरोना के कारण टली थी जनगणना

कोरोना महामारी के कारण लंबे समय से टली यह जनगणना न केवल आबादी के आंकड़े देगी, बल्कि डिजिटल इंडिया के संकल्प को भी मजबूती प्रदान करेगी। राजस्थान जैसे भौगोलिक विविधता वाले राज्य के लिए यह सटीक योजना बनाने का बड़ा आधार बनेगी।

यह रहेगी प्रमुख चुनौतियां

पश्चिमी राजस्थान के सीमावर्ती इलाकों में इंटरनेट कनेक्टिविटी की कमी डेटा सिंकिंग में बाधा बन सकती है। इसके लिए 'ऑफलाइन-फर्स्ट' मोड का उपयोग करना होगा। ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को डिजिटल ऐप के माध्यम से जानकारी देने के लिए प्रेरित करना और सुरक्षा के प्रति आश्वस्त करना बड़ी जिम्मेदारी होगी।

Published on:
09 Jan 2026 09:43 am
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