होली पर जहां देशभर में रंग-गुलाल उड़ते हैं, वहीं शहर के पंचमुखी मोक्षधाम में एक अलग ही दृश्य देखने को मिला। यहां श्रद्धालुओं ने रंगों से नहीं, बल्कि चिता की भस्म से होली खेली। आधी रात को सैकड़ों श्रद्धालु मोक्षधाम में एकत्रित हुए और काशी के काशी विश्वनाथ मंदिर स्थित मणिकर्णिका घाट की परंपरा की […]
होली पर जहां देशभर में रंग-गुलाल उड़ते हैं, वहीं शहर के पंचमुखी मोक्षधाम में एक अलग ही दृश्य देखने को मिला। यहां श्रद्धालुओं ने रंगों से नहीं, बल्कि चिता की भस्म से होली खेली। आधी रात को सैकड़ों श्रद्धालु मोक्षधाम में एकत्रित हुए और काशी के काशी विश्वनाथ मंदिर स्थित मणिकर्णिका घाट की परंपरा की तर्ज पर चिता भस्म की होली खेली। जिस श्मशान में लोग दिन में जाने से भी कतराते हैं, वहीं रात के समय ढोल-नगाड़ों की गूंज, भक्ति गीतों की स्वर लहरियां, आरती की रोशनी और हाथों में मशाल लिए श्रद्धालु भक्ति में लीन नजर आए। चारों ओर जय भैरव बाबा के जयकारों से वातावरण गूंज उठा।
शहर के मध्य स्थित पंचमुखी मोक्षधाम में होली पर्व पर प्राचीन मसानिया भैरवनाथ मंदिर से भैरव बाबा की पालकी निकाली गई। श्रद्धालु पालकी के साथ पूरे मोक्षधाम परिसर में भ्रमण करते हुए चिता भस्म की होली खेलते नजर आए। यहां रंग और गुलाल के स्थान पर दाह संस्कार की राख से तैयार भस्म एक-दूसरे को लगाई गई।
समिति अध्यक्ष रवि कुमार ने बताया कि पिछले 18 वर्षों से यह परंपरा निरंतर निभाई जा रही है। पंचमुखी मुक्तिधाम स्थित मंदिर में श्मशान की राख से भस्म तैयार कर सबसे पहले बाबा को अर्पित की जाती है। इसके बाद यही भस्म प्रसाद के रूप में श्रद्धालुओं में वितरित की जाती है। आयोजन में बच्चे, महिलाएं और पुरुष बड़ी संख्या में शामिल होते हैं और कार्यक्रम देर रात तक चलता है।
मंदिर के पुजारी संतोष कुमार के अनुसार चिता भस्म अर्पित करने और प्रसाद स्वरूप ग्रहण करने से काल, क्लेश, रोग और दोषों का नाश होता है तथा जीवन में सुख-समृद्धि आती है। श्रद्धालु पहले भस्म बाबा को अर्पित करते हैं, फिर भैरव बाबा की पालकी विभिन्न श्मशान घाटों पर रुकती है, जहां आरती कर आशीर्वाद लिया जाता है। ढोल-नगाड़ों और डीजे की धुन पर श्रद्धालु भक्ति और उत्साह में झूमते नजर आए। श्मशान में मनाई जाने वाली यह अनोखी होली अब दूर-दूर तक प्रसिद्ध हो चुकी है। हर वर्ष बड़ी संख्या में लोग यहां पहुंचकर बाबा का आशीर्वाद लेते हैं और प्रसाद स्वरूप भस्म अपने घर ले जाकर सुख-समृद्धि की कामना करते हैं।
श्रद्धालुओं का कहना है कि वे कई वर्षों से यहां चिता भस्म की होली खेलने आ रहे हैं। उनका विश्वास है कि बाबा भैरव नाथ उनकी मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं। भक्तों के अनुसार इस अनूठी भस्म होली का उन्हें पूरे साल इंतजार रहता है।
आधी रात के बाद तक श्मशान घाट में डीजे की धुन गूंजती रही। भक्तों ने धार्मिक गीतों पर जमकर नृत्य किया और बाबा के जयकारे लगाए। कई श्रद्धालु हाथों में तलवार और कटार लेकर पारंपरिक अंदाज में नृत्य करते नजर आए।