
Cheers resounded at the Adinath Digambar Jain Temple, praising the 1024 qualities of the Lord.
भीलवाड़ा शहर के आदिनाथ दिगम्बर जैन मंदिर में चल रहे श्रीसिद्धचक्र मण्डल विधान के सातवें दिन सोमवार को श्रद्धा और भक्ति का अनूठा संगम देखने को मिला। मंत्रोच्चार के बीच श्रद्धालुओं ने आठवें वलय की पूजा अर्चना की, जिसमें भगवान के विभिन्न स्वरूपों और गुणों का स्मरण करते हुए अर्घ्य समर्पित किए गए।
पूजन के दौरान विधानाचार्य जयकुमार जैन के निर्देशन में 'श्रीधराय, मरणभयनिवारणायं' से लेकर 'श्रीगमुकाय' तक कुल 424 अर्घ्य चढ़ाए गए। भक्ति का चरम उस समय देखने को मिला जब आठवें वलय के 1024 गुणों का अंतिम अर्घ्य चढ़ाया गया। इस दौरान श्रद्धालु भक्ति भाव में झूम उठे और जयकारों के साथ नृत्य करते हुए प्रभु की आराधना की।
विधान पूजन के दौरान भगवान के दिव्य गुणों के प्रतीक स्वरूप कुल 2040 श्रीफल चढ़ाकर विशेष पूजा की गई। इस अवसर पर समाज के वरिष्ठ श्रावकसनतकुमार पाटनी ने भगवान की शांतिधारा की, जिसे देखने के लिए बड़ी संख्या में जैन समाज के धर्मावलंबी उपस्थित रहे। मंगलवार को विधान का भव्य समापन होगा। विश्व शांति की कामना के साथ विश्वशांति महायज्ञ का आयोजन किया जाएगा। सुबह अभिषेक, शांतिधारा के पश्चात महायज्ञ की पूर्णाहुति दी जाएगी। श्रद्धा की धार: जब मंत्रों की गूंज और श्रद्धालुओं की अगाध आस्था मिलती है, तो पूरा वातावरण सकारात्मकता से भर जाता है। सिद्धचक्र मण्डल विधान आत्म-कल्याण का मार्ग है।
Updated on:
03 Mar 2026 09:29 am
Published on:
03 Mar 2026 09:28 am
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