3 मार्च 2026,

मंगलवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

भीलवाड़ा में खौफनाक या आध्यात्मिक? आधी रात श्मशान में धधकती चिताओं के बीच खेली गई ‘भस्म होली’, नजारा देख दंग रह गए लोग

भीलवाड़ा के पंचमुखी मोक्षधाम स्थित मसानियां भैरवनाथ मंदिर में होलिका दहन की रात अनूठी ‘भस्म होली’ खेली गई। आधी रात बाबा भैरव की पालकी श्मशान पहुंची, जहां भक्तों ने चिता भस्म से होली खेली। 16 साल से जारी इस परंपरा में दूर-दराज से श्रद्धालु शामिल हुए।

2 min read
Google source verification
Bhilwara Night of Aghori Magic Devotees Play Bhasma Holi with Pyre Ashes at Midnight

पंचमुखी मोक्षधाम स्थित मसानियां भैरवनाथ मंदिर में 'भस्म होली' का मंजर (फोटो- पत्रिका)

भीलवाड़ा: राजस्थान की वस्त्रनगरी भीलवाड़ा में सोमवार को होलिका दहन की रात आस्था, परंपरा और अघोर पंथ के अनूठे संगम की गवाह बनी। शहर के पंचमुखी मोक्षधाम स्थित मसानियां भैरवनाथ मंदिर में 'भस्म होली' का ऐसा मंजर दिखा, जिसे देख हर कोई दंग रह गया।

बता दें कि आधी रात को जब दुनिया सो रही थी, तब श्मशान की धधकती चिताओं के बीच बाबा भैरव की सवारी निकली और भक्तों ने रंग-गुलाल की जगह चिता की राख (भस्म) से होली खेली। भीलवाड़ा के पंचमुखी मोक्षधाम में यह अनूठी परंपरा पिछले 16 साल से अनवरत जारी है।

चिता भस्म से खेलते हैं होली

मंदिर के पुजारी रवि कुमार ने बताया कि जिस तरह विश्व प्रसिद्ध काशी के मणिकर्णिका घाट पर महाकाल के भक्त चिता भस्म से होली खेलते हैं। ठीक उसी तर्ज पर भीलवाड़ा में भी बाबा मसानियां भैरव के सान्निध्य में यह आयोजन होता है। भक्तों का मानना है कि भस्म होली खेलने से बाबा भैरव प्रसन्न होते हैं और जीवन के समस्त कष्टों का नाश होता है।

गाजे-बाजे के साथ रवाना हुई पालकी

आयोजन की शुरुआत होलिका दहन की मध्यरात्रि को हुई। सवा 11 बजे बाबा भैरवनाथ की भव्य पालकी गाजे-बाजे के साथ मंदिर प्रांगण से रवाना हुई। सवा 12 बजे ढोल-नगाड़ों और डीजे की गूंज के बीच पालकी मोक्षधाम के चिता स्थल पहुंची।

झूम उठे भक्त

चिता स्थल पर पहुंचते ही श्रद्धा का सैलाब उमड़ पड़ा। भक्तों ने पहले बाबा को चिता की भस्म और पुष्प अर्पित किए, फिर एक-दूसरे को उसी पवित्र राख से सराबोर कर दिया। श्मशान घाट का सन्नाटा उस समय भंग हो गया, जब डीजे पर बज रहे धार्मिक भजनों और भैरव अष्टक की धुन पर भक्त झूम उठे।

इस दौरान कई श्रद्धालु हाथों में पारंपरिक तलवारें और कटार लेकर अघोरी अंदाज में नृत्य करते नजर आए। श्मशान की आग और उड़ती हुई भस्म के बीच यह नजारा आध्यात्मिक ऊर्जा से भरा हुआ था। इस हैरतअंगेज आयोजन को देखने और इसमें शामिल होने के लिए केवल भीलवाड़ा ही नहीं, बल्कि आसपास के जिलों से भी बड़ी संख्या में महिला, बच्चे और युवा पहुंचे।

श्रद्धालुओं ने बताया कि उन्हें इस दिन का पूरे वर्ष इंतजार रहता है। उनके अनुसार, बाबा भैरव की कृपा से उनके बिगड़े काम बन जाते हैं, यही अटूट विश्वास उन्हें आधी रात को श्मशान तक खींच लाता है।