राज्य सरकार ने व्यापारियों और करदाताओं को बड़ी राहत देते हुए लंबित कर विवादों के निपटारे के लिए एमनेस्टी स्कीम-2026 लागू कर दी है। यह योजना तत्काल प्रभाव से लागू कर 30 सितंबर तक प्रभावी रहेगी। स्कीम के तहत कर की विवादित या परिदेय राशि के मामलों में निर्धारित शर्तों के अनुसार मूल कर का […]
राज्य सरकार ने व्यापारियों और करदाताओं को बड़ी राहत देते हुए लंबित कर विवादों के निपटारे के लिए एमनेस्टी स्कीम-2026 लागू कर दी है। यह योजना तत्काल प्रभाव से लागू कर 30 सितंबर तक प्रभावी रहेगी। स्कीम के तहत कर की विवादित या परिदेय राशि के मामलों में निर्धारित शर्तों के अनुसार मूल कर का 50 प्रतिशत जमा कराने पर शेष कर ब्याज, शास्ति और विलंब शुल्क में राहत दी जाएगी।
अधिसूचना के अनुसार योजना का लाभ उन मामलों में मिलेगा जिनमें 30 जून 2017 तक की अवधि से संबंधित परिदेय मांग या विवादित राशि लंबित है। इसमें राजस्थान मूल्य वर्धित कर अधिनियम-2003, केन्द्रीय विक्रय कर अधिनियम-1956 सहित अन्य संबंधित अधिनियमों के प्रकरण शामिल किए गए हैं।
स्कीम के तहत करदाता को निर्धारित प्राधिकारी को विभागीय वेबसाइट पर इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से सहमति देनी होगी। यदि करदाता 30 सितंबर 2026 तक या निर्धारित सूचना मिलने के दस दिन के भीतर अपेक्षित राशि जमा कर देता है, तो संबंधित प्रकरण स्कीम के प्रावधानों के अनुसार निस्तारित माने जाएंगे।
जिन मामलों में अपील या अन्य कार्यवाही लंबित है, उनमें निर्धारित राशि जमा कराने के बाद करदाता को न्यायालय या अपीलीय प्राधिकारी के समक्ष लंबित प्रकरणों के प्रत्याहरण (वापसी) के लिए आवेदन करना होगा।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि एमनेस्टी स्कीम-2025 के तहत लंबित या आंशिक रूप से निपटाए गए मामलों को भी इस नई स्कीम में समायोजित किया है, हालांकि, पूर्व में जमा की गई राशि का ब्याज या अधिभार के रूप में पुनर्भुगतान नहीं किया जाएगा।
विभागीय अधिकारियों के अनुसार इस योजना से वर्षों से लंबित कर विवादों के समाधान का रास्ता खुलेगा और व्यापारियों को ब्याज-शास्ति के बोझ से राहत मिलेगी। साथ ही राज्य सरकार को भी राजस्व वसूली में तेजी आने की उम्मीद है।