भीलवाड़ा

निजी स्कूलों की मनमानी: 10 गुना महंगे दामों पर प्राइवेट किताबें खरीदने को मजबूर अभिभावक

स्कूलोंं में अगल से काउंटर लगाकर नकद राशि लेकर दे रहे पुस्तकें

2 min read
Apr 05, 2026
निजी स्कूलों की मनमानी: 10 गुना महंगे दामों पर प्राइवेट किताबें खरीदने को मजबूर अभिभावक

नया शिक्षा सत्र शुरू होते ही निजी स्कूलों की मनमानी और कमीशनखोरी का खेल फिर से शुरू हो गया है। शिक्षा विभाग के सख्त निर्देशों को ठेंगा दिखाते हुए कई निजी स्कूलों ने अपने पाठ्यक्रम से राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद की किताबें पूरी तरह से गायब कर दी हैं। इनकी जगह प्राइवेट प्रकाशकों की भारी-भरकम और महंगी किताबें अभिभावकों पर जबरन थोपी जा रही हैं। हालात यह हैं कि जो एनसीईआरटी का कोर्स 500 से 800 रुपए में आ जाता है, उसी कक्षा के लिए प्राइवेट प्रकाशकों की किताबों का सेट 5 हजार से 7 हजार रुपए तक में बेचा जा रहा है। स्कूल प्रबंधन चुनिंदा बुक स्टोर्स के साथ सांठगांठ कर रहे हैं। कुछ स्कूल संचालक तो अपने यहीं पर अलग से काउंटर लगाकर नकद राशि लेकर दूसरों के नाम पर रसीद काट रहे हैं। इससे मध्यमवर्गीय और गरीब परिवारों का सालाना बजट पूरी तरह से गड़बड़ा गया है। लगातार शिकायतों के बावजूद कोई स्थायी समाधान नहीं निकलने से अभिभावकों में भारी रोष है। इस मुद्दे पर जब अभिभावकों से बात की गई, तो उनका दर्द साफ छलक कर सामने आया।

ऑनलाइन नहीं नकद राशि ले रहे

कुछ स्कूल संचालक तो अपने स्कूल में ही अलग काउंटर लगाकर पुस्तकों का वितरण कर रहे हैं। खास बात यह है कि अभिभावकों से स्कूल के कर्मचारी नकद राशि की मांग करते हैं। इसके चलते उन्हें एटीएम पर जाकर नकद राशि निकालकर लानी पड़ती है। रसीदें तक फर्जी काटी जा रही हैं जिनका किसी स्कूल के पास हिसाब नहीं है।

क्या कहते हैं अभिभावक

सालाना बजट पूरी तरह बिगड़ गया है

मेरे दो बच्चे निजी स्कूल में पढ़ते हैं। स्कूल वालों ने एक पर्ची थमा दी है और कह दिया है कि किताबें उसी एक दुकान से मिलेंगी। एक बच्चे की किताबों और कॉपियों का बिल ही 5 हज़ार रुपए बन रहा है। महंगाई के इस दौर में इन स्कूलों ने हमारा घरेलू बजट पूरी तरह से बिगाड़ दिया है।

रमेश कुमावत, अभिभावक

स्कूल से निकालने की धमकी मिलती है

जब हम स्कूल प्रबंधन से पूछते हैं कि आप सरकारी आदेशानुसार एनसीईआरटी की किताबें क्यों नहीं पढ़ाते, तो उनका सीधा जवाब होता है कि हमारे स्कूल का स्तर अलग है, अगर आपको दिक्कत है तो अपने बच्चे का नाम कटवा लीजिए। यह सीधे तौर पर लूट है।

सुनीता शर्मा, अभिभावक

शिकायतों का कोई असर नहीं होता

शिक्षा विभाग के अधिकारियों से शिकायत कर चुके हैं, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं होती। ऐसा लगता है जैसे इस कमीशन के खेल में ऊपर तक सबकी मिलीभगत है। आम आदमी जाए तो कहां जाए।

दिनेश सिंह राठौड़, अभिभावक

दोषी होने पर होगी संख्त कार्रवाई

शिक्षा विभाग के स्पष्ट निर्देश हैं कि सभी मान्यता प्राप्त स्कूलों में निर्धारित पाठ्यक्रम ही लागू होना चाहिए। यदि कोई भी स्कूल नियमों का उल्लंघन करते हुए या किसी विशेष दुकान से किताबें खरीदने का दबाव बनाते है तो उसके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।

रामेश्वर जीनगर, सीबीईओ सुवाणा

Published on:
05 Apr 2026 09:02 am
Also Read
View All

अगली खबर